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Toggleस्कूल में Smart fone स्मार्टफोन बैन: दक्षिण कोरिया ने लिया बड़ा फैसला, अब क्लासरूम में नहीं दिखेंगे फोन
Smart fone स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की लत आज के छात्रों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। इस गंभीर मुद्दे को देखते हुए, दक्षिण कोरिया ने एक कड़ा फैसला लिया है।
अब देश भर के स्कूलों में क्लासरूम के अंदर छात्रों को मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस ले जाने की अनुमति नहीं होगी। यह फैसला अगले साल मार्च से लागू होगा, जिसका मकसद छात्रों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करना और उन्हें सोशल मीडिया की लत से बचाना है।

क्यों लिया गया यह फैसला?
दक्षिण कोरिया दुनिया के उन देशों में से एक है जहां इंटरनेट और Smart fone स्मार्टफोन का इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है। देश की 98 प्रतिशत से अधिक आबादी के पास Smart fone स्मार्टफोन है। इसी वजह से, युवाओं के बीच सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग एक बड़े संकट का रूप ले रहा है।
इस नियम का प्रस्ताव लाने वाले नेता चो जुंग-हुन ने बताया कि छात्र देर रात तक इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसी ऐप्स पर लगे रहते हैं, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती। अक्सर वे रात 2-3 बजे तक जागते रहते हैं और सुबह उनकी आँखें लाल होती हैं।
इस तरह की आदतें न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि उनकी पढ़ाई और मानसिक एकाग्रता पर भी बुरा असर डालती हैं।
दक्षिण कोरिया के शिक्षा मंत्रालय द्वारा पिछले साल कराए गए एक सर्वे में भी यह बात सामने आई थी। सर्वे में शामिल मिडिल और हाई स्कूल के 37 प्रतिशत छात्रों ने यह स्वीकार किया कि सोशल मीडिया उनके दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है।
इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह थी कि 22 प्रतिशत छात्रों ने बताया कि जब वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें एंग्जायटी या बेचैनी महसूस होने लगती है। ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि यह समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है।

विश्वव्यापी चलन: अन्य देशों ने भी उठाए ऐसे कदम
दक्षिण कोरिया अकेला देश नहीं है जिसने इस तरह का फैसला लिया है। इससे पहले, ऑस्ट्रेलिया ने भी किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया था। इसी तरह, नीदरलैंड ने भी स्कूलों में स्मार्टफोन पर रोक लगा दी है।
इन फैसलों के बाद नीदरलैंड में छात्रों के ध्यान और शैक्षिक प्रदर्शन में सुधार देखा गया है। ये अंतरराष्ट्रीय उदाहरण दक्षिण कोरिया के इस कदम को और भी सही साबित करते हैं।

क्या हैं इस नियम के अपवाद?
यह नियम सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होगा, लेकिन कुछ अपवाद भी हैं। दिव्यांग बच्चों को इस नियम से बाहर रखा गया है, ताकि वे अपनी विशेष जरूरतों के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग कर सकें।
इसके अलावा, अगर किसी Smart fone स्मार्टफोन का इस्तेमाल पढ़ाई के उद्देश्य से किया जा रहा है, तो उस पर कोई रोक नहीं होगी। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि तकनीक को शैक्षिक लक्ष्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सके, जबकि गैर-जरूरी और ध्यान भटकाने वाले इस्तेमाल पर रोक लगे।
यह फैसला समाज में एक बहस का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे छात्रों के विकास के लिए एक आवश्यक कदम मान रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर प्रतिबंध के रूप में देख रहे हैं।
हालांकि, इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों के कल्याण और उनके शैक्षिक भविष्य को सुरक्षित करना है। यह उम्मीद की जा रही है कि इस फैसले से दक्षिण कोरिया के छात्रों का ध्यान पढ़ाई पर बढ़ेगा और वे एक स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली अपना सकेंगे। यह दुनिया के अन्य देशों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है जो इसी तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

