उद्योग-तैयार फूड टेक्नॉलॉजी स्नातकों को तैयार करने की दिशा में जीबीयू प्रतिवद्

Food Technology

खाद्य प्रसंस्करण एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा फूड टेक्नोलॉजिस्ट्स के लिए व्यावसायिक विकास सत्र का आयोजन

ग्रेटर नोएडा। उद्योग की मांग के अनुरूप दक्ष और रोजगार-तैयार फूड टेक्नॉलॉजी स्नातक तैयार करने की दिशा में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के खाद्य प्रसंस्करण एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की। विभाग द्वारा “फूड टेक्नोलॉजिस्ट्स के लिए प्रोफेशनल ग्रूमिंग: उद्योग की अपेक्षाएँ एवं प्लेसमेंट तत्परता” विषय पर व्यावसायिक विकास सत्र का आयोजन किया गया।

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कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कॉरपोरेट रिलेशन्स सेल के निदेशक डॉ. विनय लिटोरिया ने जीबीयू की प्लेसमेंट-केंद्रित दृष्टि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शैक्षणिक अधिगम को उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं के साथ जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने छात्रों को तकनीकी दक्षता के साथ पेशेवर कौशल विकसित करने और करियर उन्मुख सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे खाद्य उद्योग में सशक्त शुरुआत कर सकें।

सत्र का संचालन नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज इंडिया की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. काजल वर्मा तथा मारिंगल प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि श्री तरुण कुमार सिंघल ने किया। मारिंगल कंपनी बिना प्रिज़र्वेटिव और फूड एन्हांसर के शाकाहारी एवं वीगन उत्पादों के निर्माण पर केंद्रित है। वक्ताओं ने उद्योग में नियोक्ताओं की अपेक्षाओं, आवश्यक कौशल-समुच्चय तथा प्लेसमेंट तैयारी की रणनीतियों पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने खाद्य सुरक्षा प्रणालियों जैसे एचएसीसीपी, आईएसओ 22000, जीएफएसआई-बेंचमार्क मानक, उत्पाद रिकॉल तंत्र और औद्योगिक संचालन में व्यावहारिक अनुभव के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही फॉस्टैक, एफएसएससी 22000, आईएसओ 9001, बीआरसीजीएस और जीएफएसआई जैसी पेशेवर प्रमाणिकताओं को रोजगार योग्यता बढ़ाने के लिए उपयोगी बताया।

सत्र में संचार कौशल, व्यक्तित्व विकास, प्रस्तुति कौशल और साक्षात्कार तैयारी जैसे पहलुओं पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने छात्रों को खाद्य उद्योग में नवाचार और उद्यमिता के अवसरों की पहचान करने तथा उन्हें व्यवहार्य व्यावसायिक प्रस्तावों में परिवर्तित करने के लिए प्रेरित किया।

संवादात्मक चर्चा के दौरान उत्पाद विकास, बाजार में प्रवेश रणनीतियाँ, पैकेजिंग का बढ़ता महत्व, प्रिज़र्वेटिव रहित खाद्य पदार्थों की मांग, फूड एन्हांसर का न्यूनतम उपयोग, फ्रेंचाइज़ मॉडल, स्वचालन और खाद्य प्रसंस्करण में आधुनिक प्रौद्योगिकी के एकीकरण जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम के अंत में छात्रों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इस प्रकार के सत्र उन्हें उद्योग की वास्तविक अपेक्षाओं को समझने और अपने करियर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

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