GIMS में ऑर्थो असेंट वर्कशॉप का आयोजन, युवा ऑर्थोपेडिक डॉक्टरों को सर्जिकल स्किल्स की दी गई विशेष ट्रेनिंग

ग्रेटर नोएडा, 10 मई 2026: गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS), ग्रेटर नोएडा के ऑर्थोपेडिक्स विभाग द्वारा जॉनसन एंड जॉनसन इंस्टीट्यूट के सहयोग तथा ग्रेटर नोएडा ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के तत्वावधान में “ऑर्थो असेंट प्रोग्राम: स्यूचरिंग एंड नॉटिंग वर्कशॉप” का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यशाला का उद्देश्य युवा ऑर्थोपेडिक चिकित्सकों और प्रशिक्षु डॉक्टरों की सर्जिकल दक्षता को मजबूत करना था।
कार्यशाला में 60 से अधिक पोस्टग्रेजुएट (PG) छात्रों और डीएनबी रेजिडेंट्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को बेसिक से लेकर एडवांस स्तर की स्यूचरिंग और नॉटिंग तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि सर्जरी के दौरान सही तरीके से टांके लगाने और गांठ बांधने की तकनीक किसी भी ऑर्थोपेडिक सर्जन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की खास बात यह रही कि प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि उन्हें वास्तविक सर्जिकल परिस्थितियों जैसा अनुभव भी कराया गया। इसके लिए ड्राई सिमुलेशन मॉडल और वेट बोवाइन नी स्पेसिमेन का उपयोग किया गया, जिससे युवा डॉक्टरों को वास्तविक ऑपरेशन थिएटर जैसी परिस्थितियों में अभ्यास करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान टिश्यू हैंडलिंग, सटीकता और ऑपरेशन की दक्षता पर विशेष ध्यान दिया गया।
GIMS के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश कुमार गुप्ता ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की स्किल-बेस्ड वर्कशॉप युवा डॉक्टरों में सर्जिकल आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ मरीजों को बेहतर उपचार प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण का महत्व लगातार बढ़ रहा है और ऐसे कार्यक्रम मेडिकल छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं।
GIMS के ऑर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. विकास सक्सेना ने कहा कि व्यवस्थित और संरचित हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग ही सर्जिकल शिक्षा की मजबूत नींव है। उनके अनुसार इस प्रकार के कार्यक्रम छात्रों की तकनीकी दक्षता को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें जटिल सर्जरी के लिए भी तैयार करते हैं।
ऑर्थोपेडिक्स विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रतीक रस्तोगी ने कहा कि स्यूचरिंग और नॉटिंग किसी भी ऑर्थोपेडिक सर्जन की मूलभूत कौशल होती है। यदि डॉक्टरों को शुरुआती स्तर पर ही बेहतर प्रशिक्षण मिल जाए, तो वे भविष्य में अधिक कुशल और आत्मविश्वासी सर्जन बन सकते हैं।
कार्यक्रम में ग्रेटर नोएडा ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. ए.पी. सिंह और मैक्स हॉस्पिटल के कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सूर्यकांत ने भी अपने अनुभव और विशेषज्ञ सुझाव साझा किए। उनके इंटरैक्टिव सेशंस ने प्रतिभागियों को सर्जरी से जुड़ी कई व्यावहारिक जानकारियां प्रदान कीं।
पूरी कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों में सीखने को लेकर उत्साह देखने को मिला। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में किए गए अभ्यास ने कार्यक्रम को बेहद उपयोगी और प्रभावी बना दिया। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यावहारिक और कौशल-आधारित ट्रेनिंग भविष्य में बेहतर सर्जिकल परिणाम और मरीजों की गुणवत्ता पूर्ण देखभाल सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगी।
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