संघर्ष से सिद्धि तक 7 Success Story इंटरव्यू और 11 मेन्स के बाद सविता रानी ने रचा इतिहास, बनीं बीडीओ

संघर्ष से सिद्धि तक 7 Success Story इंटरव्यू  और 11 मेन्स के बाद सविता रानी ने रचा

इतिहास, बनीं बीडीओ

 

 

 

सफलता की राह कभी सीधी नहीं होती, लेकिन अटूट विश्वास और निरंतर प्रयास कठिन से कठिन रास्ते को भी आसान बना देते हैं. आज की सफलता की कहानी (Success Story) ग्रेटर नोएडा की सविता रानी की है, जिन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षा में शानदार जीत हासिल कर यह साबित कर दिया है कि हौसले के आगे हर बाधा छोटी है. सविता का चयन ‘खंड विकास अधिकारी’ (BDO) के पद पर हुआ है, जो उन लाखों महिलाओं के लिए एक मिसाल है जो घर और करियर के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रही हैं.

11 मेन्स और 7 इंटरव्यू का धैर्यपूर्ण सफर

सविता रानी के लिए यह सफलता की कहानी (Success Story) रातों-रात नहीं लिखी गई. उनके इस सफर की शुरुआत साल 2015 में हुई थी. अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए उन्होंने एक लंबा और धैर्यपूर्ण रास्ता तय किया. उनकी दृढ़ता का प्रमाण इसी बात से मिलता है कि उन्होंने अब तक कुल 11 बार मेन्स (Mains) परीक्षा लिखी और 7 बार इंटरव्यू के अंतिम पड़ाव तक पहुँचीं. बार-बार मिली असफलताओं ने उनके इरादों को कमजोर नहीं किया, बल्कि और मजबूती दी, जिसके परिणामस्वरूप अंततः 2026 में उन्होंने अपना सपना साकार कर लिया.

पारिवारिक जिम्मेदारियां और समय प्रबंधन की चुनौती

सविता रानी की यह सफलता की कहानी (Success Story) इसलिए भी विशेष है क्योंकि वह पहले से ही दिल्ली शिक्षा निदेशालय में एक सरकारी शिक्षिका के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं. एक कामकाजी महिला होने के साथ-साथ उन पर अपने दो छोटे बच्चों और पूरे परिवार की देखभाल की बड़ी जिम्मेदारी थी.

सविता बताती हैं कि उनके इस सफर में उनके पति का बहुत बड़ा हाथ रहा. वास्तव में, यूपीपीसीएस अधिकारी बनने का सपना उनके पति का ही था, जिसे सविता ने अपनी कड़ी मेहनत से पूरा करने का संकल्प लिया. उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती समय प्रबंधन (Time Management) की थी. नौकरी और घर की व्यस्तता के बीच पढ़ाई के लिए कीमती समय निकालना एक बड़ा संघर्ष था. उनका मानना था कि उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं था, क्योंकि एक सुरक्षित नौकरी पहले से थी, लेकिन पाने के लिए एक बड़ा आसमान (उच्च पद) बाकी था.

पूर्व चयन और बड़े लक्ष्य के लिए त्याग

यह जानकर हैरानी होगी कि सविता का चयन इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण पदों पर हो चुका था. उनका चयन ‘सहायक जिला रोजगार सहायता अधिकारी’, ‘नायब तहसीलदार’ और ‘सीनियर लेक्चरर डाइट’ जैसे पदों पर हुआ था. हालांकि, छोटे बच्चों की जिम्मेदारी और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उन्होंने इन पदों को जॉइन नहीं किया. उनके भीतर अपने लक्ष्य को लेकर एक भूख बनी रही, जिसने उन्हें मेहनत जारी रखने के लिए प्रेरित किया.

सविता रानी का युवाओं और महिलाओं के लिए मार्गदर्शन

अपनी इस सफलता की कहानी (Success Story) के जरिए सविता ने आगामी प्रतियोगियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए हैं:

  • लक्ष्य पर एकाग्रता: सफलता के लिए अपने लक्ष्य के प्रति जुनून और एकाग्रता सबसे पहली शर्त है.

  • बड़ा सोचें: कभी भी अपनी उम्र, पारिवारिक स्थिति या संसाधनों की कमी को अपनी प्रगति में बाधा न बनने दें. हमेशा ऊँचा सोचें और उसे पाने की दिशा में काम करें.

  • समय का सही नियोजन: सफलता के लिए उपलब्ध समय का अधिकतम और बेहतरीन उपयोग करना बहुत जरूरी है.

  • सोशल मीडिया का संतुलित उपयोग: आज के समय में सोशल मीडिया का उपयोग केवल अपनी जानकारी और फायदे के लिए करें, न कि कीमती समय बर्बाद करने के लिए.

सविता रानी की यह सफलता की कहानी (Success Story) हमें सिखाती है कि असली जीत वही है, जब पूरी दुनिया आपकी हार की प्रतीक्षा कर रही हो और आपका हौसला आपको एक और कोशिश के लिए तैयार कर दे.

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