भक्ति की लहर से गूंजा Noida: कीर्तन संध्या में हज़ारों लोगों ने पाया आंतरिक शांति का अनुभव

योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (YSS)

Noida । योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (YSS) के Noida आश्रम में शनिवार को आयोजित भक्ति‍मय कीर्तन एवं ध्यान संध्या ने आध्यात्मिक ऊर्जा से पूरे वातावरण को भर दिया। इस विशेष आयोजन में हज़ारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर सामूहिक भक्ति और ध्यान की परिवर्तनकारी शक्ति का अनुभव किया।

यह कार्यक्रम परमहंस योगानन्द द्वारा न्यूयॉर्क के कारनेगी हॉल में आयोजित ऐतिहासिक कीर्तन की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में किया गया। उस ऐतिहासिक अवसर पर हजारों लोगों ने “ओ गॉड ब्यूटीफुल ” कीर्तन के माध्यम से गहन आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की थी। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी स्मरणानन्दजी और स्वामी अद्यानन्दजी के प्रेरणादायक संबोधनों से हुआ। स्वामी स्मरणानन्दजी ने कहा कि भक्ति से ओतप्रोत संगीत एक सार्वभौमिक भाषा है, जो हर हृदय को छूती है और साधक को सीधे परमात्मा से जोड़ती है। उन्होंने भक्ति‍मय कीर्तन को एक वैज्ञानिक आध्यात्मिक अभ्यास बताते हुए कहा कि यह मन को एकाग्र कर ध्यान की अवस्था तक पहुँचने में अत्यंत सहायक है।

भक्ति की लहर से गूंजा Noida: कीर्तन संध्या में हज़ारों लोगों ने पाया आंतरिक शांति का अनुभव
भक्ति की लहर से गूंजा Noida: कीर्तन संध्या में हज़ारों लोगों ने पाया आंतरिक शांति का अनुभव

संध्या का मुख्य आकर्षण ब्रह्मचारी भास्करानन्द जी के नेतृत्व में हुआ सामूहिक कीर्तन था, जिसमें “ओ गॉड ब्यूटीफुल ” सहित कई भक्ति गीत प्रस्तुत किए गए। अंग्रेज़ी और हिन्दी में गूंजते कॉस्मिक चैंट्स के बीच-बीच में ध्यान के क्षणों ने प्रतिभागियों को गहरी आंतरिक शांति का अनुभव कराया। श्रद्धालुओं ने बताया कि इस कीर्तन के दौरान उन्हें मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक उत्थान की अनुभूति हुई। आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। कार्यक्रम के अंत में स्वामी अद्यानन्दजी ने उपस्थित लोगों को YSS की शिक्षाओं और राजयोग के मार्ग को अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिसमें भक्ति, ध्यान और संतुलित जीवन का समन्वय होता है।

यह आयोजन वैश्विक शताब्दी समारोह का हिस्सा था, जिसके तहत उसी दिन न्यूयॉर्क के कार्नेगी हॉल में भी समानांतर कार्यक्रम आयोजित किया गया।संध्या के समापन पर एक संदेश हर हृदय में गूंजता रहा—जब संगीत भक्ति से जुड़ता है, तो वह केवल ध्वनि नहीं, बल्कि दिव्यता का अनुभव बन जाता है।

ये भी पढ़ें…….

हमारे दूसरे प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें…..

Related posts

Leave a Comment