डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) और साइबर अपराध (Cyber Crime) का बढ़ता जाल, प्रोफेसर आर.बी. सिंह ने बताए बचाव के तरीके

डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) और साइबर अपराध (Cyber Crime)

गौतमबुद्ध नगर (Gautam Buddha Nagar): डिजिटल युग में जहां तकनीक ने जीवन सुगम बनाया है, वहीं साइबर अपराध (Cyber Crime) एक गंभीर चुनौती बनकर उभरा है। ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) स्थित द्रोणाचार्य ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में कार्यरत प्रोफेसर डॉ. आर.बी. सिंह ने हाल ही में बढ़ते साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) और विशेष रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) जैसे मामलों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार अपराधी आम जनता की भावनाओं और डर का फायदा उठाकर उनकी मेहनत की कमाई लूट रहे हैं।

डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) का काला सच
प्रोफेसर आर.बी. सिंह ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) का मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। अपराधी वीडियो कॉल (Video Call) के माध्यम से लोगों को डराते हैं कि उन्हें पुलिस या किसी जांच एजेंसी ने घर पर ही ‘अरेस्ट’ कर लिया है। डॉक्टर सिंह ने जोर देते हुए कहा कि संवैधानिक (Constitutional) या कानूनी रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) जैसा कोई प्रावधान भारत में अस्तित्व में नहीं है। यह पूरी तरह से अपराधियों द्वारा बुना गया एक मनोवैज्ञानिक जाल है।

अपराधी अक्सर पुलिस कमिश्नर, जज या सीबीआई (CBI) अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करते हैं। वे कमरे में ऐसा माहौल (Atmosphere) तैयार करते हैं जो बिल्कुल सरकारी दफ्तर जैसा दिखता है, जिससे पीड़ित घबरा जाता है। डर के मारे व्यक्ति किसी से यह जानकारी साझा (Share) नहीं करता और अपराधी इसी का फायदा उठाकर मोटी रकम वसूल लेते हैं।

कैसे जाल बिछाते हैं अपराधी (Cyber Criminals)?
प्रोफेसर सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी (Cyber Criminals) आधुनिक तकनीक (Technology) का दुरुपयोग करते हैं। वे अक्सर डेटा चोरी के माध्यम से लोगों के आधार कार्ड (Aadhaar Card Redacted), पैन कार्ड (PAN Card) और बैंकिंग विवरण (Banking Details) हासिल कर लेते हैं। उन्हें पहले से पता होता है कि किस व्यक्ति के खाते में कितनी राशि जमा है।

अपराधी कॉल पर व्यक्ति को धमकाते हैं कि उनके नाम से कोई अवैध पार्सल (Illegal Parcel) पकड़ा गया है या उनके पहचान पत्र (Identity Card) का उपयोग किसी बड़े अपराध में हुआ है। जब व्यक्ति घबरा जाता है, तो उसे किसी से बात न करने की चेतावनी दी जाती है और उसे घंटों तक वीडियो कॉल पर ‘बंधक’ (Hostage) बनाकर रखा जाता है।

ऑनलाइन शॉपिंग और फर्जी ऐप्स (Fake Apps) का खतरा
कोरोना काल के बाद ऑनलाइन मार्केटिंग (Online Marketing) और डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) का चलन बढ़ा है। इसी का फायदा उठाकर अपराधी फर्जी वेबसाइट (Fake Website) और आकर्षक डिस्काउंट (Discount) के नाम पर लोगों को ठगते हैं। डॉ. आर.बी. सिंह ने सुझाव दिया कि किसी भी अनजान लिंक (Unknown Link) पर क्लिक न करें। हमेशा आधिकारिक स्टोर जैसे ‘गूगल प्ले स्टोर’ (Google Play Store) या ‘एप्पल ऐप स्टोर’ (Apple App Store) से ही विश्वसनीय ऐप (App) इंस्टॉल करें। कई बार ज्यादा छूट के चक्कर में लोग गलत ऐप डाउनलोड कर लेते हैं, जिससे उनका मोबाइल हैक (Hack) हो जाता है।

युवाओं और छात्रों के लिए चेतावनी
प्रोफेसर सिंह ने विशेष रूप से युवाओं (Youth) और छात्रों (Students) को आगाह किया। उन्होंने बताया कि ग्रेटर नोएडा (Greater Noida) जैसे शैक्षिक केंद्र में कई छात्र ऑनलाइन गेमिंग (Online Gaming) और सट्टेबाजी (Betting) जैसे जुए (Gambling) के जाल में फंस रहे हैं। इन गतिविधियों में पैसे हारने के बाद छात्र भारी मानसिक तनाव (Stress) में आ जाते हैं। डॉक्टर सिंह ने साझा किया कि कुछ दुखद मामलों में छात्रों ने आत्महत्या (Suicide) जैसा आत्मघाती कदम तक उठा लिया है। अभिभावकों (Parents) को भी अपने बच्चों की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखने की आवश्यकता है।

बचाव और जागरूकता (Awareness) ही समाधान
भारत सरकार ने साइबर अपराध (Cyber Crime) की रिपोर्टिंग के लिए हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ जारी किया है। हालांकि, जागरूकता (Awareness) की कमी के कारण अब भी प्रतिदिन हजारों मामले दर्ज हो रहे हैं। डॉ. आर.बी. सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली 70% जनसंख्या अब भी इन खतरों से अनजान है।

बचाव के मुख्य बिंदु:

साझा करें (Share): यदि कोई अनजान व्यक्ति आपको डराता है, तो तुरंत अपने परिवार या दोस्तों को बताएं। साझा करने से 90% ठगी रुक सकती है।

सत्यापन (Verification): कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल पर पैसे की मांग नहीं करती।

गोपनीयता (Privacy): अपना ओटीपी (OTP), आधार (Aadhaar Card Redacted) या बैंक विवरण किसी को न दें।

शिकायत (Complaint): साइबर ठगी होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल (Cyber Cell) से संपर्क करें।

अंत में, डॉ. आर.बी. सिंह ने संदेश दिया कि एक बार पैसा खाते से निकल जाने पर रिफंड (Refund) होना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए, तकनीक का उपयोग सावधानी और समझदारी (Wisdom) से करें। सतर्कता ही साइबर सुरक्षा (Cyber Security) का सबसे मजबूत हथियार है।

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