Prime Minister नरेंद्र मोदी ने भारतीयों से विदेशों की बजाय देश में डेस्टिनेशन वेडिंग करने का किया आह्वान

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Prime Minister नरेंद्र मोदी ने भारतीयों से विदेशों की बजाय देश में डेस्टिनेशन वेडिंग करने का किया आह्वान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के धन को देश में ही रखने और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक नई अपील की है। उन्होंने भारतीय परिवारों, विशेषकर संपन्न वर्ग से आग्रह किया है कि वे अपने बच्चों की शादियों के लिए विदेशों का रुख करने के बजाय भारत के भीतर ही खूबसूरत स्थलों का चयन करें। प्रधानमंत्री का यह आह्वान न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक गर्व और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को एक नई ऊंचाई देने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

स्वदेशी विवाह और सांस्कृतिक गौरव

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान इस बात पर जोर दिया कि भारत की धरती से अधिक पवित्र और सुंदर जगह विवाह बंधन में बंधने के लिए और कोई नहीं हो सकती। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या हमारे पास भारत में ऐसे स्थान नहीं हैं जहाँ हम छुट्टियां मना सकें या अपने बच्चों को अपने गौरवशाली इतिहास से रूबरू करा सकें? मोदी ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आजकल एक फैशन सा बन गया है कि लोग विदेशों में जाकर करोड़ों रुपये खर्च करते हैं, जबकि वही पैसा और अवसर भारत के स्थानीय व्यापारियों और रोजगार सृजन में काम आ सकता है।

प्रधानमंत्री (Prime Minister) का मानना है कि जब भारतीय परिवार अपने ही देश के विभिन्न राज्यों में जाकर डेस्टिनेशन वेडिंग (Destination Wedding) करेंगे, तो इससे वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था को जबरदस्त मजबूती मिलेगी। होटल उद्योग, परिवहन, स्थानीय कलाकार और छोटे व्यापारियों को इससे सीधा लाभ पहुंचेगा। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने भीतर यह गर्व का भाव विकसित करें कि वे अपने देश की मिट्टी और अपनी संस्कृति के बीच जीवन के सबसे महत्वपूर्ण उत्सव को मनाएं।

आर्थिक प्रभाव और स्थानीय विकास

प्रधानमंत्री (Prime Minister) ने स्पष्ट किया कि जब कोई भी बड़ा आयोजन भारत के भीतर होता है, तो उसका एक “मल्टीप्लायर इफेक्ट” होता है। एक शादी में केवल दो परिवार नहीं जुड़ते, बल्कि टेंट लगाने वाले से लेकर फूल बेचने वाले और कैटरिंग करने वाले तक हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। विदेशों में शादी (Wedding) करने से यह सारा पैसा दूसरे देशों की झोली में चला जाता है। ‘वेड इन इंडिया’ की अवधारणा के माध्यम से मोदी भारत को दुनिया के वेडिंग हब के रूप में विकसित करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामरूप तक अनगिनत ऐसे स्थान हैं जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक भव्यता के लिए जाने जाते हैं। चाहे वह राजस्थान के शाही महल हों, उत्तराखंड की शांत वाणियां हों या दक्षिण भारत के भव्य मंदिर, हर जगह एक अलग अनुभव और दिव्यता मौजूद है। प्रधानमंत्री (Prime Minister) ने जोर देकर कहा कि यदि हम अपने स्थानों पर गर्व करना शुरू करेंगे, तो दुनिया भी हमारी ओर आकर्षित होगी।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

यह अपील केवल एक सुझाव नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के विजन का हिस्सा है। प्रधानमंत्री ने युवाओं और समाज के प्रभावशाली वर्ग से इस मुहिम का नेतृत्व करने को कहा है। उन्होंने कहा कि हमारे बच्चों को अपना इतिहास पता होना चाहिए और यह तभी संभव है जब हम अपने पर्यटन स्थलों को महत्व देंगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि समाज के बड़े वर्गों को इस बारे में जागरूकता फैलानी चाहिए ताकि डेस्टिनेशन वेडिंग (Destination Wedding) का मतलब केवल विदेश यात्रा न रह जाए।

 प्रधानमंत्री (Prime Minister) की यह पहल भारतीय संस्कृति के संरक्षण और आर्थिक संवर्धन का एक अनूठा संगम है। यदि भारतीय समाज इस आह्वान को गंभीरता से लेता है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख विवाह गंतव्य के रूप में उभरेगा, जिससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि देश के भीतर ही लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

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