YEIDA का ‘स्मार्ट विलेज’ And और विकास की हकीकत: बल्लू खेड़ा में लापरवाही का आरोप
गौतम बुद्ध नगर, 18 अगस्त 2025: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने क्षेत्र के कई गाँवों को ‘स्मार्ट विलेज’ के रूप में विकसित करने का वादा किया था.
लेकिन, YEIDA यीडा के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं. सेक्टर 22 डी में स्थित गाँव बल्लू खेड़ा में चल रहे विकास कार्यों की दयनीय स्थिति ने प्राधिकरण के दावों की पोल खोल दी है.
ग्रामीणों और स्थानीय एक्टिविस्टों का आरोप है कि ठेकेदारों की लापरवाही और घटिया सामग्री के इस्तेमाल ने ‘स्मार्ट विलेज’ की अवधारणा को गहरा धक्का पहुँचाया है.

स्मार्ट विलेज योजना की हकीकत
यमुना प्राधिकरण ने अपनी ‘स्मार्ट विलेज’ योजना के तहत गाँवों में आधुनिक सुविधाएँ, जैसे पेयजल, सीवर लाइनें, बेहतर सड़कें, नालियाँ, डिजिटल लाइब्रेरी और सामुदायिक केंद्र उपलब्ध कराने की घोषणा की थी.
इसका उद्देश्य इन गाँवों में जीवन स्तर को बेहतर बनाना And और उन्हें शहरी सुविधाओं से जोड़ना था. लेकिन, बल्लू खेड़ा गाँव में चल रहे काम से स्थानीय लोग बेहद निराश हैं.
एक्टिव सिटीजन टीम के सदस्य हरेंद्र भाटी ने ठेकेदारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि “यमुना प्राधिकरण के दावों And और जमीनी हकीकत में भारी अंतर है. स्मार्ट विलेज के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई हो रही है.
ठेकेदारों द्वारा निर्माण में घटिया किस्म की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सड़कें And और नालियाँ बनने के कुछ ही समय बाद खराब हो रही हैं. यह सीधे तौर पर जनता के पैसे की बर्बादी है.”
ग्रामीणों का आक्रोश और मांग
गाँव के लोगों में इस लापरवाही को लेकर भारी रोष है. उन्होंने बताया कि विकास कार्यों की धीमी गति और घटिया गुणवत्ता से उनकी परेशानियाँ कम होने के बजाय बढ़ गई हैं.
नालियाँ ठीक से नहीं बनी हैं, जिससे जल-भराव की समस्या पैदा हो रही है. सड़कों पर भी गड्ढे दिखाई देने लगे हैं, जो दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं.
ग्रामीणों ने मांग की है कि यमुना प्राधिकरण इन अनियमितताओं पर तुरंत ध्यान दे. उन्होंने ठेकेदारों की जवाबदेही सुनिश्चित करने और गुणवत्तापूर्ण कार्यों के लिए कड़े कदम उठाने की अपील की है. उनका कहना है कि जब तक काम सही तरीके से नहीं होता, तब तक ‘स्मार्ट विलेज’ का सपना अधूरा ही रहेगा.

उच्चस्तरीय जाँच की मांग
हरेंद्र भाटी ने इस मामले में एक उच्चस्तरीय बैठक की मांग की है. उन्होंने कहा कि यमुना विकास प्राधिकरण YEIDA के उच्चाधिकारियों को कागजी रिपोर्टों पर भरोसा करने के बजाय खुद गाँवों का दौरा करना चाहिए और वास्तविक स्थिति का जायजा लेना चाहिए.
उनका मानना है कि जब तक वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप नहीं करेंगे, तब तक स्थिति में सुधार नहीं होगा.
इस मामले ने न केवल बल्लू खेड़ा बल्कि यीडा YEIDA के तहत आने वाले अन्य गाँवों में भी चल रहे विकास कार्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
लोगों को उम्मीद है कि प्राधिकरण इस शिकायत को गंभीरता से लेगा और जल्द से जल्द कार्रवाई करेगा ताकि ‘स्मार्ट विलेज’ योजना का असली मकसद पूरा हो सके.
यह देखना बाकी है कि प्राधिकरण इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों को कब तक राहत मिल पाती है.

