‘सुशासन’ पर सवाल और तेजस्वी पर वार: Chirag चिराग पासवान क्यों बने बिहार की राजनीति के रहस्य?

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‘सुशासन’ पर सवाल और तेजस्वी पर वार: Chirag चिराग पासवान क्यों बने बिहार की राजनीति के रहस्य?

बिहार की सियासत में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री Chirag चिराग पासवान एक ऐसे किरदार बनकर उभरे हैं जिनके इरादे और रणनीति को समझना किसी पहेली से कम नहीं है.

एक तरफ वह एनडीए के वफादार सिपाही बने हुए हैं, तो दूसरी तरफ नीतीश कुमार की सरकार पर तीखे हमले बोल रहे हैं. हाल ही में गया में एक महिला अभ्यर्थी के साथ हुए दुष्कर्म की घटना पर  Chirag  चिराग ने बिहार पुलिस और प्रशासन को ‘निकम्मा’ करार दे दिया, जिससे बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई.

वहीं, जेडीयू ने तुरंत इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी जारी कर दी और कहा कि “अति सर्वत्र वर्जयेत्!”, यानी किसी भी तरह की अति (अधिकता) से हमेशा परहेज करना चाहिए.

दरअसल,  Chirag  चिराग पासवान ने सीधे नीतीश कुमार पर हमला बोला और कहा कि, यह कहते हुए दुख होता है कि वह ऐसी सरकार का समर्थन कर रहे हैं, जहां अपराध बेलगाम है. जाहिर है, उनका यह बयान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘सुशासन’ के दावों पर सवाल उठाते हैं, जिसे बिहार में एनडीए सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है.

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चिराग पासवान

Chirag  चिराग पासवान की दोहरी रणनीति

दरअसल,  Chirag  चिराग पासवान की राजनीतिक रणनीति में यह दोहरा रुख साफ दिखता है. एक ओर वे लगातार नीतीश कुमार के नेतृत्व में 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत का दावा करते हैं. उन्होंने हाल ही में कई बार कहा है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व पर कोई सवाल नहीं है.

दूसरी ओर, पटना में गोपाल खेमका हत्याकांड और नालंदा में दो युवकों की हत्या जैसे मामलों पर वह लगातार नीतीश सरकार को कठघरे में खड़ा करते हैं. गया दुष्कर्म की घटना को लेकर भी उन्होंने नीतीश सरकार को घेरा.

खास बात यह है कि उनकी यह आलोचना न केवल जदयू को असहज करती है, बल्कि एनडीए के भीतर की संभावित टेंशन को भी उजागर करती है. ऐसे में, जदयू भी चिराग पासवान पर हमलावर होने का कोई मौका नहीं चूक रहा है.

 

जदयू को  Chirag  चिराग से किस बात का डर?

चिराग पासवान के ताजा बयान पर जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने साफ तौर पर कहा, “अति सर्वत्र वर्जयेत्!” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि Chirag  चिराग पासवान का शरीर कहीं है और आत्मा कहीं है, और इस पीड़ा का खात्मा नहीं हो सकता है.

नीरज कुमार ने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह का भरोसा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर है, तो  Chirag  चिराग पासवान का मन विचलित हो रहा हो तो वह जानें. जनता का भरोसा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर है.

दरअसल, जदयू के सूत्रों का मानना है कि  Chirag  चिराग पासवान 2020 के विधानसभा चुनाव की तरह एक बार फिर ‘वोटकटवा’ की भूमिका निभा सकते हैं. 2020 में उनकी पार्टी ने जदयू के खिलाफ 134 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिसके परिणामस्वरूप जदयू को 28 सीटों पर नुकसान हुआ था.

यही कारण रहा कि जदयू बिहार में पहले नंबर की पार्टी से खिसककर तीसरे नंबर की पार्टी बन गई थी. जदयू को डर है कि  Chirag  चिराग के लगातार हमले उनकी वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं और एनडीए के भीतर दरार पैदा कर सकते हैं.

 

Chirag  चिराग की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा!

Chirag  चिराग पासवान की राजनीतिक रणनीति का एक और खास हिस्सा यह भी है कि वह नीतीश सरकार के साथ-साथ समान रूप से तेजस्वी यादव और राजद पर भी हमला बोलते हैं. यह उनकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है.

विशेष गहन संशोधन (SIR) के विवाद पर वोट बहिष्कार की बात कहने को लेकर चिराग ने तेजस्वी यादव और कांग्रेस को निशाने पर लिया और सीधा कहा, “हिम्मत है तो चुनाव का बहिष्कार करके दिखाएं.

इनमें अकेले लड़ने की हिम्मत नहीं. मैंने 2020 में अकेले चुनाव लड़ा था.” जाहिर है, उनका यह बयान तेजस्वी यादव की लोकप्रियता को टारगेट कर कमजोर करने की कोशिश है, जो हाल के सर्वे में मुख्यमंत्री पद के लिए पहली पसंद बने हैं. चिराग पासवान का यह तंज राजद के MY (मुस्लिम-यादव) वोट बैंक को टारगेट कर एनडीए के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास हो सकता है.

 

नीतीश सरकार को क्यों निशाना बना रहे चिराग?

वहीं, दूसरी ओर प्रशांत किशोर की तारीफ में Chirag  चिराग का खुलकर बोलना भी सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है. उन्होंने प्रशांत की ‘जातिविहीन समाज’ की विचारधारा को अपनी सोच से मिलता-जुलता बताया.

यह बयान न केवल उनकी युवा और प्रगतिशील छवि को मजबूत करता है, बल्कि प्रशांत की जन सुराज पार्टी के साथ भविष्य में संभावित गठजोड़ की अटकलों को भी हवा देता है. हालांकि, चिराग पासवान ने बार-बार स्पष्ट किया है कि वे एनडीए के साथ हैं और 2020 जैसी बगावत नहीं करने जा रहे हैं.

ऐसे में सवाल यही है कि फिर वह नीतीश सरकार को कठघरे में क्यों खड़े कर रहे हैं? क्या Chirag   चिराग पासवान असमंजस में हैं या इस राजनीति के पीछे कोई गहरी रणनीति है?

 

Chirag  चिराग पासवान की रणनीति के पीछे क्या?

राजनीति के जानकारों का मानना है कि  Chirag  चिराग की यह रणनीति एनडीए की सुनियोजित चाल भी हो सकती है. दरअसल, बीजेपी बहुत हद तक नीतीश कुमार पर निर्भर है. ऐसे में, चिराग पासवान को तेजस्वी यादव की युवा अपील और आक्रामक छवि की काट के रूप में इस्तेमाल कर रही हो.

Chirag  चिराग की दलित और पासवान वोटों (लगभग 6%) पर मजबूत पकड़ और उनकी ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ की छवि उन्हें युवा मतदाताओं के बीच आकर्षक बनाती है. यह बीजेपी को दलित और युवा वोटों को आकर्षित करने में मदद कर सकता है.

दूसरी ओर, कुछ का मानना है कि Chirag   चिराग अपनी मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षा को पोषित कर रहे हैं. हाल के सर्वे में उनकी लोकप्रियता 10.6% रही, जो नीतीश (18.4%) और तेजस्वी (36.9%) से कम है, लेकिन प्रशांत किशोर (16.4%) से ज्यादा है. यह आंकड़े उनकी बढ़ती राजनीतिक हैसियत को दर्शाते हैं.

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चिराग पासवान क्यों बने बिहार की राजनीति के रहस्य?

बिहार की सियासत पर क्या होगा असर?

Chirag  चिराग पासवान की यह रणनीति एनडीए को मजबूत करने के साथ-साथ जदयू को दबाव में रख सकती है. उनकी आलोचना से नीतीश की ‘सुशासन’ छवि को नुकसान हो सकता है, जिसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है.

वहीं, तेजस्वी यादव पर उनके हमले महागठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं. हालांकि, अगर चिराग की यह रणनीति बैकफायर करती है, तो एनडीए की एकता खतरे में पड़ सकती है, जैसा कि 2020 में हुआ था.

Chirag  चिराग की युवा अपील और आक्रामक शैली उन्हें भविष्य का बड़ा नेता बना सकती है, लेकिन अभी उनकी असल मंशा बिहार की राजनीति में एक रहस्य बनी हुई है. यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ‘रहस्यमयी किरदार’ बिहार की राजनीतिक बिसात पर कौन सी नई चाल चलता है.

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