आज भारत के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव आया, जब president राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति चुनाव में शानदार जीत हासिल की। उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को भारी मतों से हराया। यह चुनाव मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद हुआ था, जिससे यह पद खाली हो गया था।

यह जीत एनडीए के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उसके मजबूत संख्याबल और सटीक रणनीति का प्रमाण है।
क्यों हुआ यह चुनाव?
भारत के vice president election 2025 के लिए यह चुनाव 21 जुलाई 2025 को मौजूदा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद हुआ। इस अचानक हुए चुनाव ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी थी, लेकिन एनडीए ने तुरंत अपने उम्मीदवार की घोषणा कर चुनावी जंग के लिए कमर कस ली थी।
vice president election 2025: आंकड़े और समीकरण
- उपराष्ट्रपति चुनाव का परिणाम पहले से ही तय माना जा रहा था, क्योंकि चुनावी समीकरण पूरी तरह से एनडीए के पक्ष में थे।
- कुल मतदाता: लोकसभा और राज्यसभा के कुल 781 सांसद इस चुनाव में मतदान के पात्र थे।
- जीत के लिए जरूरी वोट: जीत सुनिश्चित करने के लिए 391 वोटों का जादुई आंकड़ा पार करना था।
- एनडीए का संख्याबल: सीपी राधाकृष्णन को 427 सांसदों का समर्थन मिलने की उम्मीद थी, जो बहुमत के आंकड़े से कहीं ज्यादा है।
- विपक्ष का संख्याबल: विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी के पक्ष में 354 सांसदों के समर्थन की संभावना थी।
मतदान प्रक्रिया और राजनीतिक दांव
चुनाव के दिन, संसद भवन में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले अपना वोट डालकर एनडीए के लिए एक मजबूत संदेश दिया। मतदान के बाद शाम 6 बजे से मतगणना शुरू हुई, और 7:30 pm तक परिणाम की घोषणा कर दी गई।
एनडीए ने इस 15th-vice-president चुनाव में किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए एक विशेष रणनीति अपनाई, जिसे ‘मैन टू मैन मार्किंग’ कहा गया। इस रणनीति के तहत, एनडीए के सांसदों को अलग-अलग समूहों में बांटा गया ताकि उनका वोट सही तरीके से डाला जा सके और कोई भी क्रॉस-वोटिंग न हो।
विभिन्न पार्टियों का रुख भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण साबित हुआ:
- वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने एनडीए उम्मीदवार को समर्थन दिया।
- बीजू जनता दल (बीजद) और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने मतदान से दूरी बनाए रखी।
- आम आदमी पार्टी (आप) ने विपक्ष के उम्मीदवार का साथ दिया।
गुप्त मतदान और पार्टी लाइन
उपराष्ट्रपति चुनाव एक गुप्त मतदान प्रक्रिया है, जिसमें सांसदों पर पार्टी का व्हिप लागू नहीं होता। इसका मतलब है कि सांसद अपनी पसंद से वोट डाल सकते हैं। हालांकि, आमतौर पर देखा गया है कि सांसद पार्टी के निर्देशों का पालन करते हैं, और इस चुनाव में भी यही प्रवृत्ति दिखी।
अंततः, वोटों की गिनती पूरी होने के बाद, सीपी राधाकृष्णन की जीत की आधिकारिक घोषणा हुई, और वे अब भारत के नए उपराष्ट्रपति के रूप में अपना कार्यभार संभालने के लिए तैयार हैं। यह जीत भारतीय राजनीति में एनडीए के बढ़ते प्रभाव और रणनीतिक कुशलता को दर्शाती है।
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