Varanasi में शर्मसार हुए रिश्ते, कलयुगी मां ने ’10 साड़ी और 16 हजार’ में अधेड़ को बेची 12 साल की मासूम बेटी
उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक राजधानी वाराणसी (Varanasi) से एक ऐसी दिल दहला देने वाली और अमानवीय घटना सामने आई है, जिसने पूरे समाज और पवित्र रिश्तों को तार-तार कर दिया है। यहाँ एक कलयुगी माँ पर अपनी ही 12 वर्ष की मासूम बेटी का सौदा करने का बेहद संगीन आरोप लगा है। चंद पैसों और साड़ियों के लालच में अंधी हो चुकी माँ ने अपनी जिगर के टुकड़े को एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति को सौंप दिया, जिसके बाद उस मासूम बच्ची को चार महीने तक नरक जैसी जिंदगी जीने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस खौफनाक वारदात की जानकारी जैसे ही सामने आई, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
लालच में चंदौली के अधेड़ को बेची बेटी
मिली जानकारी के अनुसार, वाराणसी के एक इलाके की रहने वाली महिला ने बेहद शर्मनाक कृत्य करते हुए अपनी 12 साल की नाबालिग बेटी का सौदा मात्र 16 हजार रुपये नकद और 10 साड़ियों के बदले कर दिया। इस सौदेबाजी के बाद पड़ोसी जनपद चंदौली के रहने वाले एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति ने बच्ची को खरीद लिया। वह शख्स उस मासूम को अपने साथ ले गया और पिछले चार महीनों तक उसके साथ लगातार जबरन दुष्कर्म (rape) करता रहा। वह मासूम डर और दर्द के साये में घुट-घुट कर जीने को मजबूर थी, लेकिन उसकी चीखें सुनने वाला कोई नहीं था।
बनारस स्टेशन पर ऑटो चालक ने की दरिंदगी
नरक की इस जिंदगी से किसी तरह भागकर या छूटकर जब वह मासूम बच्ची बनारस रेलवे स्टेशन (Banaras Station) पर पहुँची, तो उसे लगा कि शायद अब वह सुरक्षित है। लेकिन समाज के एक और दरिंदे की नजर उस बेबस बच्ची पर पड़ गई। स्टेशन पर मौजूद एक ऑटो चालक ने बच्ची को अकेला और असहाय पाकर उसकी मजबूरी का फायदा उठाया। उसने भी उस मासूम बच्ची के साथ बेरहमी से ज्यादती की। एक के बाद एक हुई इन दर्दनाक घटनाओं ने बच्ची को शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ कर रख दिया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई, तीनों आरोपी जेल में
जब इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले की भनक स्थानीय पुलिस को लगी, तो महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत मुकदमा दर्ज किया और टीमों का गठन कर तफ्तीश शुरू की। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी कलयुगी माँ, बच्ची को खरीदने वाले चंदौली के अधेड़ और बनारस स्टेशन पर ज्यादती करने वाले ऑटो चालक सहित तीनों आरोपियों को गिरफ्तार (arrested) कर लिया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अदालत के निर्देश पर तीनों आरोपियों को सलाखों के पीछे (jail) भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले में कड़ी कानूनी पैरवी कर रही है ताकि दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।
सामाजिक ताने-बाने और सुरक्षा पर गंभीर सवाल
इस दिल दहला देने वाली वारदात ने एक बार फिर समाज के भीतर छिपी विकृति और बच्चों की सुरक्षा (child safety) को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस माँ को बच्चे की ढाल और सबसे सुरक्षित पनाह माना जाता है, जब वही चंद रुपयों और कपड़ों के लालच में कसाई बन जाए, तो रिश्तों पर से विश्वास उठना स्वाभाविक है। इसके साथ ही, सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे स्टेशनों पर रात के समय गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं कि आखिर एक लावारिस हालत में घूम रही मासूम बच्ची पर सुरक्षाकर्मियों की नजर क्यों नहीं पड़ी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल पुलिसिया कार्रवाई ही काफी नहीं है, बल्कि समाज में बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। फिलहाल, पीड़ित मासूम बच्ची को सुरक्षित अभिरक्षा में भेजकर उसकी काउंसलिंग (counseling) कराई जा रही है, ताकि वह इस भयानक मानसिक आघात (trauma) से बाहर निकल सके। स्थानीय लोग इस घटना को लेकर बेहद आक्रोशित हैं और आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग कर रहे हैं।
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