TET राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सेवारत शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से मुक्त करने की मांग की, पीएम को संबोधित ज्ञापन सौंपा
TET सूरजपुर, 15 सितम्बर 2025: अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) के आह्वान पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने आज जिलाधिकारी कार्यालय, सूरजपुर में प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन उच्चतम न्यायालय के 1 सितम्बर 2025 के उस निर्णय के विरोध में दिया गया, जिसमें सभी सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा टीईटी TET अनिवार्य कर दी गई है।
इस निर्णय से देशभर के लगभग 20 लाख शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा और आजीविका खतरे में पड़ गई है। जिलाध्यक्ष अशोक यादव ने बताया कि एबीआरएसएम के तत्वावधान में पूरे भारत में एक साथ जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 और एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना को नजरअंदाज किया, जिसमें उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी TET से छूट दी गई थी।
इस निर्णय से 2011 से पहले वैध रूप से नियुक्त शिक्षकों की नौकरी भी असुरक्षित हो गई है। जिला महामंत्री अजयपाल नागर ने कहा कि यह निर्णय लाखों शिक्षकों को असमंजस और चिंता में डाल रहा है। जिला संगठन मंत्री ललिता पालीवाल ने मांग की कि यह निर्णय केवल भविष्यलक्षी होना चाहिए, ताकि 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर इसका प्रभाव न पड़े।
जिला कोषाध्यक्ष रवींद्र रोसा ने अनुभवी शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए त्वरित नीतिगत या विधायी कदम उठाने की अपील की। शिक्षकों ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा भी आवश्यक है।
उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर त्वरित और न्यायोचित समाधान करेंगे। इस अवसर पर सौरभ रुहेला, शेखर कौशिक, विजय नागर, सुनील कुमार, रुचि चौहान, रणधीर सिंह, राहुल भाटी, ब्रजेश सिंह, मोहित शर्मा, श्वेता श्रीवास्तव, सीमारानी, निरुपमा मिश्रा सहित सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।

