सहमति की उम्र घटाने पर गंभीर Discussion चर्चा: SGT यूनिवर्सिटी ने ‘सभ्यता पर अतिक्रमण’ विषय पर राउंड टेबल का आयोजन किया
नई दिल्ली, 28 अगस्त 2025:
एसजीटी यूनिवर्सिटी, गुरुग्राम ने ‘नेटवर्क फॉर एक्सेस टू जस्टिस एंड मल्टीडिसिप्लिनरी आउटरीच फाउंडेशन’ के साथ मिलकर ‘सभ्यता पर अतिक्रमण: सहमति की उम्र घटाना – इसके प्रभाव का विश्लेषण’ विषय पर एक महत्वपूर्ण गोलमेज Discussion चर्चा का आयोजन किया।
यह विचारोत्तेजक कार्यक्रम इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में हुआ, जिसका उद्देश्य भारत में सहमति की उम्र को कम करने के संभावित कानूनी, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभावों पर गहन चिंतन करना था।

मुख्य अतिथि और वक्ताओं का संबोधन
कार्यक्रम में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के माननीय सदस्य श्री प्रियंक कानूनगो ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और अपना सारगर्भित मुख्य भाषण दिया।
इस अवसर पर एसजीटी यूनिवर्सिटी के ‘एडवांस स्टडी इंस्टीट्यूट ऑफ एशिया’ के रिसर्च डायरेक्टर श्री अमोघ देव राय ने शुरुआती टिप्पणी दी।
उन्होंने इस मुद्दे की संवेदनशीलता और समाज पर इसके संभावित प्रभावों पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम को ‘नेशनल मेडिकोस एसोसिएशन’ और ‘आरोग्य भारती’ जैसे प्रतिष्ठित संगठनों का भी समर्थन प्राप्त था।
विद्वानों और विशेषज्ञों की भागीदारी
इस Discussion चर्चा में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिनमें डॉ. निमेश देसाई, डॉ. अमित खन्ना, डॉ. पुष्पा, डॉ. वरुण, डॉ. निशांत गोयल, सुश्री सीमा सिंह और सुश्री निधि शर्मा (निदेशक, नेटवर्क फॉर एक्सेस टू जस्टिस एंड मल्टीडिसिप्लिनरी आउटरीच फाउंडेशन) शामिल थीं।
इन विशेषज्ञों ने भारत में सहमति की उम्र को कम करने के दूरगामी परिणामों पर व्यापक चर्चा की। विशेष रूप से, नाबालिगों के बीच रोमांटिक यौन संबंधों से जुड़े मामलों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
वक्ताओं ने इस नीतिगत बदलाव के संभावित प्रभावों की जाँच की, जिसमें नाबालिगों की सुरक्षा, शोषण की रोकथाम, सामाजिक मानदंडों की सुरक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण जैसे पहलू शामिल थे।

कानूनी दृष्टिकोण और सिफारिशें
Discussion चर्चा के दौरान, विशेषज्ञों ने बाल संरक्षण कानूनों के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया कि मौजूदा कानूनी ढाँचे के सुरक्षात्मक इरादे को कमजोर किए बिना, युवाओं के अधिकारों और सुरक्षा की रक्षा की जाए।
कार्यक्रम में एक व्यापक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई, जिसमें प्रमुख कानूनी दृष्टिकोणों, शोध निष्कर्षों और जमीनी स्तर की जानकारियों को शामिल किया गया था।
चर्चा में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 15, किशोरों के बीच रोमांटिक यौन संबंधों से जुड़े मामलों को संबोधित करने के लिए एक व्यवहार्य कानूनी तंत्र प्रदान करती है।
यह प्रावधान किशोर न्याय बोर्ड (JJB) को एक प्रारंभिक मूल्यांकन करने का अधिकार देता है ताकि शोषणकारी परिस्थितियों और गैर-शोषणकारी, सहकर्मी-स्तरीय संबंधों के बीच अंतर किया जा सके। यह सुनिश्चित करता है कि नाबालिगों को दुर्व्यवहार से बचाया जाए, जबकि बच्चे के सर्वोत्तम हित को भी बनाए रखा जाए।
महत्वपूर्ण दिशा
यह गोलमेज Discussion चर्चा इस बात को रेखांकित करती है कि सहमति की उम्र जैसे संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करना कितना महत्वपूर्ण है। एसजीटी यूनिवर्सिटी और उसके सहयोगी संगठनों द्वारा आयोजित इस तरह की चर्चाएँ समाज और नीति निर्माताओं को एक महत्वपूर्ण दिशा देती हैं।
यह स्पष्ट है कि कानूनी बदलावों को सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों के साथ-साथ बच्चों के हित को सर्वोपरि रखकर ही किया जाना चाहिए। इस तरह के आयोजनों से न केवल जागरूकता बढ़ती है, बल्कि एक मजबूत और संवेदनशील समाज के निर्माण में भी मदद मिलती है।

