Negligence नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्राधिकरण की लापरवाही: दो मौतें, एक ही कहानी

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Negligence नोएडा-ग्रेटर नोएडा में प्राधिकरण की लापरवाही: दो मौतें, एक ही कहानी प्राधिकरण की बार-बार अनदेखी से दो युवा जान गंवा बैठे


नोएडा और ग्रेटर नोएडा में विकास के नाम पर सुरक्षा उपायों की कमी ने दो अलग-अलग लेकिन एक जैसी त्रासदियों को जन्म दिया। 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत नोएडा सेक्टर 150 में पानी से भरे गहरे गड्ढे में कार गिरने से हुई, जबकि करीब 10-11 महीने पहले स्टेशन मास्टर भरत भाटी की भी ग्रेटर नोएडा में खुले नाले में गाड़ी गिरने से जान चली गई। दोनों मामलों में प्राधिकरण द्वारा बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, दिशा-सूचक बोर्ड या वार्निंग साइन की कमी मुख्य वजह बनी। मौत के बाद ही जागे प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं
कब तक ऐसी लापरवाही Negligence जारी रहेगी?
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मृतक की फाइल फोटो Negligence
भरत भाटी हादसा:
पहली चेतावनी जो अनसुनी रही (मार्च 2025) दिल्ली के मंडावली निवासी भारत भाटी (रेलवे स्टेशन मास्टर, मानेसर स्टेशन) 1 मार्च 2025 को दोपहर करीब 3 बजे फरुखनगर से ग्रेटर नोएडा के रामपुर/गिरधरपुर गांव किसी शादी में जा रहे थे।
  • ग्रेटर नोएडा सेक्टर पी-3/पी-4 के पास यू-टर्न के बाद रास्ता अचानक बंद था, सामने 30 फीट गहरा खुला नाला।
  • कोई बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर या दिशा-सूचक बोर्ड नहीं लगा था।
  • गूगल मैप का इस्तेमाल करते हुए तेज रफ्तार में गाड़ी (सुजुकी डिजायर) सीधे नाले में जा गिरी।

स्थानीय लोगों ने सूचना दी, पुलिस पहुंची और ग्रामीणों की मदद से उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक मौत हो चुकी थी। मृतक के भाई दिलीप भाटी ने स्पष्ट कहा: “यह पूरी तरह ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही थी।

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मृतक युवराज की फाइल फोटो Negligence
हादसे के बाद बीटा-2 पुलिस ने अस्थायी बैरिकेडिंग लगाई, लेकिन प्राधिकरण ने स्थायी उपाय नहीं किए। बाद में रास्ता बंद कराया गया, पर जान वापस नहीं लौटी।युवराज मेहता हादसा: दोहराई गई लापरवाही (जनवरी 2026)16 जनवरी 2026 की रात, 27 वर्षीय युवराज मेहता (टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी, सेक्टर 150 निवासी, दुनहम्बी कंपनी गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर) घर लौट रहे थे।
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  • घने कोहरे में सेक्टर 150 के निर्माणाधीन मॉल के पास 90 डिग्री मोड़ पर कार नियंत्रण खो बैठी।
  • टूटी/कमजोर बाउंड्री वॉल तोड़कर कार 30-70 फीट गहरे पानी भरे बेसमेंट/ट्रेंच में जा गिरी।
  • युवराज किसी तरह कार से बाहर निकले, छत पर चढ़कर 1.5-2 घंटे तक मदद मांगते रहे (पिता को फोन किया, टॉर्च जलाकर सिग्नल दिए, चिल्लाए “पापा, मुझे बचा लो”)।
  • रेस्क्यू में देरी (ठंड, आयरन रॉड्स, दृश्यता कम होने का हवाला), अंततः डूबने और हार्ट अटैक से मौत।

परिवार का आरोप: नोएडा प्राधिकरण को सालों से शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। हादसे के बाद ही दिशा-सूचक बोर्ड, मार्किंग लगाई गई। प्रतिक्रिया: नोएडा अथॉरिटी CEO हटाए गए, जूनियर इंजीनियर टर्मिनेट, SIT जांच, बिल्डर (विजटाउन प्लानर्स के डायरेक्टर) गिरफ्तार।दोनों हादसों में समानताएं और बड़े सवाल

  • प्राधिकरण द्वारा सुरक्षा उपायों (बैरिकेडिंग, वार्निंग साइन, रिफ्लेक्टर) की पूर्ण अनदेखी।
  • भरत भाटी के हादसे से सबक नहीं लिया गया, नतीजा: युवराज की मौत।
  • घना कोहरा/दृश्यता कम होने पर ब्लैक स्पॉट जानलेवा साबित हुए।
  • मौत के बाद ही प्रशासन जागा—कार्रवाई, जांच, सुधार।

दोनों परिवार न्याय मांग रहे हैं। दिलीप भाटी का कहना: “मेरे भाई की मौत भी प्राधिकरण की लापरवाही से हुई। जिम्मेदार कौन? ” ये घटनाएं विकास की चकाचौंध में इंसानी जान की कीमत को बेनकाब करती हैं। प्रशासन को अब तत्काल सख्त नीति, नियमित निरीक्षण और जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है ताकि “हादसा” की आड़ में ऐसी त्रासदियां न दोहराई जाएं।

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