Fake फर्जी दूतावास चलाने वाला हर्षवर्धन जैन STF के हत्थे चढ़ा, 44 लाख से अधिक नकदी और डिप्लोमेटिक सामग्री बरामद

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Fake फर्जी दूतावास चलाने वाला हर्षवर्धन जैन STF के हत्थे चढ़ा, 44 लाख से अधिक नकदी और डिप्लोमेटिक सामग्री बरामद

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 22 जुलाई 2025 को गाजियाबाद के कविनगर क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए हर्षवर्धन जैन नामक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। हर्षवर्धन पर अपने घर में अवैध रूप से Fake फर्जी दूतावास चलाकर नागरिकों और कंपनियों को विदेशों में काम दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी और दलाली कर मोटी रकम अर्जित करने का आरोप है।

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बरामद रुपए और विदेशी करेंसी

गिरफ्तारी और बरामदगी का विवरण

STF नोएडा की टीम ने गहन सूचना संकलन के बाद कविनगर के केबी-35 आवास पर छापेमारी की, जहां हर्षवर्धन जैन को 22 जुलाई 2025 को रात 11:30 बजे गिरफ्तार किया गया। अभियुक्त के कब्जे से 44 लाख 70 हजार रुपये की नकदी, विभिन्न देशों की मुद्रा, 4 डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट वाली गाड़ियां, 20 जोड़ी डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट, 12 फर्जी पासपोर्ट, विदेश मंत्रालय की जाली मोहर वाले दस्तावेज, 34 विभिन्न स्वघोषित देशों और कंपनियों की सील, 12 महंगी घड़ियां, एक लैपटॉप, एक मोबाइल फोन, आधार कार्ड, वोटर आईडी, और Fake फर्जी प्रेस व डिप्लोमेटिक कार्ड बरामद किए गए।

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बरामद डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट कार

अभियुक्त का आपराधिक इतिहास और पृष्ठभूमि

47 वर्षीय हर्षवर्धन जैन, पुत्र जे.डी. जैन, गाजियाबाद के कविनगर का निवासी है। उसने गाजियाबाद से बीबीए और लंदन से एमबीए की डिग्री हासिल की है। उसके पिता एक प्रतिष्ठित उद्योगपति थे, जो जैन रोलिंग मिल और राजस्थान में मार्बल माइंस के मालिक थे। हर्षवर्धन ने लंदन में मार्बल निर्यात का कारोबार भी किया।

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आरोपी से बरामद घड़ियां

वर्ष 2000 में वह चर्चित व्यक्ति चन्द्रास्वामी के संपर्क में आया, जिसने उसकी मुलाकात सऊदी अरब के आर्म्स डीलर अदनान खरगोशी और एहसान अली सैयद से कराई। इसके बाद हर्षवर्धन ने लंदन और दुबई में कई Fake फर्जी कंपनियां बनाकर दलाली का धंधा शुरू किया। वर्ष 2006 में वह दुबई में बस गया और वहां शफीक (हैदराबाद) और इब्राहीम अली-बिन-शारमा (दुबई) के साथ मिलकर फर्जी कंपनियों के जरिए धोखाधड़ी की।

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आरोपी के विदेशियों के साथ फोटो

2011 में भारत लौटने के बाद उसने गाजियाबाद में फर्जी दूतावास स्थापित किया, जहां विभिन्न देशों के झंडे और डिप्लोमेटिक नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगा। 2012 में गाजियाबाद पुलिस ने उसके पास से सैटेलाइट फोन बरामद किया था, जिसके लिए थाना कविनगर में मुकदमा दर्ज हुआ था। हर्षवर्धन ने स्वघोषित माइक्रोनेशनों जैसे सेबोरगा, वेस्ट आरटिका, और पॉल्बिया लोडोनिया से Fake फर्जी एम्बेसडर का पद हासिल कर लोगों को प्रभावित किया और धोखाधड़ी का जाल बिछाया।

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आरोपी की देश के प्रधानमंत्री के साथ फोटो

कानूनी कार्रवाई

STF ने हर्षवर्धन के खिलाफ थाना कविनगर, गाजियाबाद में मुकदमा संख्या 671/2025, धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2) बी.एन.एस. के तहत मामला दर्ज कराया है। स्थानीय पुलिस द्वारा अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। STF की सक्रियता
STF नोएडा के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्र और पुलिस उपाधीक्षक नवेन्दु कुमार के नेतृत्व में निरीक्षक सचिन कुमार और सनत कुमार की टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। यह कार्रवाई Fake फर्जी दूतावासों और धोखाधड़ी के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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