राजस्थान Courtहाई कोर्ट में SI पेपर लीक पर घमासान: सरकार के दोहरे रवैये और SOG पर उठे सवाल
राजस्थान पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती 2021 में पेपर लीक का मामला एक बार फिर गरमा गया है। राजस्थान हाई Court कोर्ट में लगातार पांचवें दिन सुनवाई जारी रही, जहां न्यायमूर्ति समीर जैन ने सरकार और जांच एजेंसी, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की।
Courtकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि वह राजस्थान की जनता को पेपर लीक से बने थानेदारों के भरोसे नहीं छोड़ सकते हैं, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।

सरकार के दोहरे मापदंड पर Courtकोर्ट की नाराजगी
अदालत ने सरकार के रुख पर गंभीर सवाल उठाए। एक तरफ सरकार यह तर्क दे रही है कि भर्ती को रद्द करने का फैसला जल्दबाजी होगी, वहीं दूसरी ओर वह यह भी स्वीकार कर रही है कि पेपर लीक में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्यों और कोचिंग माफिया की मिलीभगत रही है।
न्यायमूर्ति जैन ने इसे सरकार का “दोहरा मापदंड” करार दिया। यह स्थिति उन हजारों युवाओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगाती है, जो इस भर्ती प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं। लंबे समय से चल रहे इस पेपर लीक के मामलों ने युवाओं में निराशा भर दी है, और अभ्यर्थी लगातार अपनी दलीलें कोर्ट के सामने पेश कर रहे हैं। पांचवें दिन की सुनवाई के बाद भी कुछ दलीलें अधूरी रह गईं, जिससे अभ्यर्थियों की चिंता और बढ़ गई है।
SOG की भूमिका पर भी सवाल
हाई Court कोर्ट ने इस मामले में SOG की भूमिका पर भी संदेह व्यक्त किया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पहले SOG कह रही थी कि वह भर्ती में सही-गलत की पहचान नहीं कर सकती, लेकिन अब वही एजेंसी दावा कर रही है कि वह दोषियों को छांट सकती है। यह विरोधाभास जांच की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ, तो SIT प्रमुख वी.के. सिंह या डीजीपी को एक बार फिर अदालत में बुलाकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा जा सकता है। यह दर्शाता है कि कोर्टCourt इस मामले की तह तक जाने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा।
याचिकाकर्ताओं और सरकार की दलीलें
सुनवाई की शुरुआत में, चयनित अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ए.के. शर्मा ने दलील पेश की कि याचिकाकर्ताओं ने तथ्यों को छिपाकर याचिका दायर की है, इसलिए इसे खारिज किया जाना चाहिए।
हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कोर्ट Court किसी दायरे में बंधा नहीं है और वह याचिका से परे जाकर भी निर्णय देने के लिए स्वतंत्र है। यह Court कोर्ट के व्यापक अधिकार क्षेत्र और न्याय सुनिश्चित करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सरकार की Courtओर से कोर्ट को बताया गया कि अब तक भर्ती प्रक्रिया में 50 अभ्यर्थियों को डी-बार (अयोग्य) किया गया है। इस पर कोर्ट ने कड़ा सवाल उठाया कि यदि आगे की जांच में यह संख्या 200 तक पहुंच गई तो फिर सरकार क्या करेगी? यह प्रश्न इस बात पर जोर देता है कि पेपर लीक का पैमाना कितना व्यापक हो सकता है और सरकार को इस पर कितनी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

निर्णायक मोड़ पर SI भर्ती 2021 मामला
इस मामले में अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी। राजस्थान हाई Court कोर्ट की इन टिप्पणियों और कड़े रुख को देखते हुए यह माना जा रहा है कि SI भर्ती 2021 का मामला अब एक निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है।
कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह भर्ती प्रक्रिया में सामने आई व्यापक अनियमितताओं को लेकर बेहद गंभीर है और यदि आवश्यक हुआ तो कठोर आदेश देने से भी पीछे नहीं हटेगा।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 14 जुलाई को होने वाली सुनवाई में क्या नए तथ्य सामने आते हैं और हाई Court कोर्ट इस गंभीर मुद्दे पर क्या अंतिम निर्णय लेता है, जो हजारों युवाओं के भविष्य और राज्य की भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।क्या आपको लगता है कि राजस्थान में पेपर लीक के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए और कड़े कानूनों की जरूरत है?
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