कोर्ट (Court) के आदेश को ठेंगा दिखाकर स्क्रैप माफिया रवि काना की रिहाई, बांदा जेल अधीक्षक तलब
ग्रेटर नोएडा/नोएडा, 31 जनवरी 2026 — उत्तर प्रदेश के कुख्यात स्क्रैप माफिया और गैंगस्टर रवि काना (रविंदर नागर उर्फ रवि काना) की रिहाई ने न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नोएडा के सेक्टर-63 थाने में दर्ज एक गंभीर आपराधिक मामले में बी-वारंट (B-Warrant) जारी होने के बावजूद जिला कारागार बांदा से उन्हें 29 जनवरी 2026 को रिहा कर दिया गया। इस लापरवाही पर गौतम बुद्ध नगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने सख्त रुख अपनाते हुए बांदा जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण तलब किया है।
घटना का क्रम
- 29 जनवरी 2026 को रवि काना को बी-वारंट के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गौतम बुद्ध नगर अदालत में पेश किया गया।
- अदालत ने उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेजा और 2 फरवरी 2026 तक कस्टडी में रखने का आदेश दिया।
- लेकिन उसी दिन शाम 6:39 बजे बांदा जेल प्रशासन ने उन्हें रिहा कर दिया, जबकि नोएडा केस में कोई रिहाई आदेश नहीं था और वारंट जारी था।
- रिहाई के बाद पुलिस को कस्टडी वारंट मिला, लेकिन तब तक रवि काना जेल से गायब हो चुका था। कुछ रिपोर्ट्स में उसकी विदेश भागने की आशंका भी जताई जा रही है।
अदालत की कार्रवाई
CJM अदालत (Court) ने इस मामले को गंभीर लापरवाही करार देते हुए बांदा जेल अधीक्षक से तीन प्रमुख सवालों पर लिखित जवाब मांगा है:
- बी-वारंट पर तलब होने की जानकारी के बावजूद आरोपी को रिहा क्यों किया गया?
- बिना रिहाई आदेश या उचित प्रक्रिया के रिहाई कैसे हुई?
- क्या इसे कस्टडी से आरोपी को जानबूझकर छोड़ने की गंभीर चूक माना जाए, और जेल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई क्यों न हो?
अदालत (Court) ने जेल अधीक्षक को 6 फरवरी 2026 तक शपथ-पत्र के साथ विस्तृत स्पष्टीकरण दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही रवि काना के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर तत्काल गिरफ्तारी के आदेश दिए गए हैं।
रवि काना का बैकग्राउंड
रवि काना नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में स्क्रैप (कबाड़) और सरिया व्यापार से जुड़े माफिया के रूप में कुख्यात हैं। उन पर गैंगस्टर एक्ट, जबरन वसूली, ठेके हथियाने, धमकी, फर्जीवाड़ा और अन्य संगीन आरोप हैं।
- अप्रैल 2024 में थाईलैंड से डिपोर्ट होकर दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार हुए थे।
- उनकी महिला साथी काजल झा भी साथ पकड़ी गई थी (बाद में जमानत मिली)।
- गैंगवार की आशंका के चलते 2024 में नोएडा जेल से बांदा जेल शिफ्ट किया गया था।
- उनकी 200 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
विशेषज्ञों की राय और सवाल
कानूनी जानकारों का कहना है कि बी-वारंट जारी होने के बाद आरोपी को संबंधित अदालत की स्पष्ट अनुमति के बिना रिहा नहीं किया जा सकता। यह घटना न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करती है और जेल प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है।
प्रिजन्स मंत्री सुरेश राही सहित कई नेताओं ने भी इस पर बयान दिए हैं, और जांच की मांग हो रही है।पुलिस अब रवि काना की तलाश में जुटी है। क्या यह महज प्रशासनिक चूक थी या कुछ और? इस मामले की सुनवाई और जांच आगे क्या खुलासा करेगी, यह देखना बाकी है।
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