Assam असम के 15 जिलों में मुस्लिम आबादी में हुई वृद्धि

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Assam असम के 15 जिलों में मुस्लिम आबादी में हुई वृद्धि

Assam असम, भारत –

भारत के पूर्वोत्तर राज्य  Assam असम की जनसांख्यिकीय स्थिति एक बार फिर बहस का केंद्र बन गई है। असम विधानसभा के उपाध्यक्ष और भाजपा नेता डॉ. नुमाल मोमिन ने हाल ही में एक चौंकाने वाला दावा किया है कि Assam असम के 15 जिले अब मुस्लिम बहुल हो चुके हैं, जबकि देश की आजादी के समय राज्य में एक भी मुस्लिम बहुल जिला नहीं था। उनके इस बयान ने राज्य में जनसंख्या संतुलन और कथित घुसपैठ को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है।

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असम के 15 जिलों में मुस्लिम आबादी की वृद्धि

“जनसंख्या संतुलन बिगड़ रहा, यह एक खतरा” – डॉ. मोमिन

डॉ. मोमिन ने अपने बयान में Assam असम की स्थिति को “बेहद चिंताजनक” बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में जनसंख्या का संतुलन बिगड़ रहा है, और यह “एक सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक खतरे का संकेत” है।

उन्होंने दावा किया कि निचले Assam असम से लेकर मध्य और ऊपरी असम तक “वैज्ञानिक और रणनीतिक तरीके” से घुसपैठ हो रही है। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक सामान्य प्रवास नहीं है, बल्कि एक “सुनियोजित प्रयास” है, जिसका उद्देश्य राज्य की जनसांख्यिकी को बदलना है।

डॉ. मोमिन ने यह भी बताया कि राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा इस मुद्दे को लेकर गंभीर हैं और लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए “सख्त कदम” उठा रही है और आने वाले समय में और भी ठोस रणनीतियां बनाई जाएंगी। यह दर्शाता है कि भाजपा सरकार इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से ले रही है और इसे अपनी प्राथमिकताओं में से एक मान रही है।

मुस्लिम आबादी में वृद्धि: आंकड़े क्या कहते हैं?

Assam असम की जनगणना के आंकड़ों पर गौर करें तो, राज्य में मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 1951 में यह लगभग 24% थी, जो 2011 की जनगणना तक बढ़कर 34% के करीब पहुँच गई थी। हालांकि 2021 की जनगणना अभी तक नहीं हुई है, लेकिन राज्य सरकार और कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि इस दशक में यह आंकड़ा और बढ़ा है।

राज्य के जिन जिलों को मुस्लिम बहुल कहा जा रहा है, उनमें धुबरी, बारपेटा, गोलपाड़ा, हैलाकांडी, करीमगंज, मोरीगांव, नागांव, दक्षिण सालमारा, बोंगाईगांव, दरंग, उडालगुड़ी, और कोकराझार जैसे जिले प्रमुख हैं। इन जिलों में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत राज्य के औसत से काफी अधिक है, जिसने जनसंख्या संतुलन को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

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मुस्लिम आबादी में वृद्धि

हिंदू आबादी में गिरावट के कारण और ‘अवैध घुसपैठ’ का आरोप

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदू आबादी में गिरावट के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हो सकते हैं, जैसे शहरीकरण, शिक्षा स्तर में वृद्धि, और छोटे परिवारों की ओर झुकाव। ये कारक आमतौर पर कई विकासशील समाजों में देखे जाते हैं।

हालांकि, डॉ. मोमिन का तर्क है कि इन कारकों के अलावा, “बांग्लादेश से हो रही अवैध घुसपैठ और सुनियोजित बसावट” इसकी एक बड़ी वजह है। उन्होंने इस मसले पर राजनीति न करने और इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से” देखने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पहले भी इस मुद्दे पर मुखर रहे हैं। उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि राज्य में “जनसंख्या विस्फोट” एक गंभीर समस्या है। इसे नियंत्रित करने के लिए, सरकार ने कुछ कड़े कदम भी उठाए हैं, जैसे दो से अधिक बच्चों वाले लोगों को सरकारी नौकरियों से बाहर करना। यह नीति राज्य में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

 

राजनीतिक विमर्श बनाम जमीनी हकीकत

Assam असम में जनसंख्या संतुलन को लेकर चिंता कोई नई बात नहीं है। यह मुद्दा दशकों से राज्य की राजनीति और सामाजिक विमर्श का हिस्सा रहा है। लेकिन, अब जब राज्य के डिप्टी स्पीकर ने खुलकर इसे “सुनियोजित घुसपैठ” कहा है, तो यह मसला फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है।

सवाल यह है कि क्या वाकई Assam असम की जनसांख्यिकीय तस्वीर बदली जा रही है, या फिर यह केवल राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है, जिसका उपयोग चुनावी लाभ के लिए किया जा रहा है? इस बहस का समाधान आने वाले समय में केंद्र और राज्य सरकार की ठोस कार्रवाई, नीतिगत बदलावों और सबसे महत्वपूर्ण, जनगणना के नए आंकड़ों से ही हो पाएगा। तब तक, यह मुद्दा Assam असम के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य पर हावी रहेगा।

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