रिटायरमेंट के बाद भी देश सेवा: मिलिए इंदरजीत सिंह सिद्धू Sidhu से, जो हर सुबह उठा रहे हैं चंडीगढ़ का कचरा
जहां अधिकांश लोग रिटायरमेंट के बाद आराम और सुकून भरी ज़िंदगी की तलाश करते हैं, वहीं 88 वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू Sidhu ने एक ऐसी अनूठी और प्रेरणादायक मिसाल पेश की है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है.
यह रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हर सुबह चंडीगढ़ की सड़कों पर एक साइकिल ठेला लेकर निकलते हैं और चुपचाप कचरा उठाते हैं. उनकी यह निस्वार्थ सेवा देखकर कोई भी यह अंदाज़ा नहीं लगा सकता कि यह शख्स कभी भारतीय पुलिस सेवा का एक वरिष्ठ अधिकारी रहा है.

आनंद महिंद्रा भी हुए कायल
Sidhu सिद्धू के इस असाधारण कार्य ने सिर्फ आम लोगों को ही नहीं, बल्कि जाने-माने उद्योगपति आनंद महिंद्रा को भी प्रभावित किया है. महिंद्रा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर Sidhu सिद्धू का एक वीडियो साझा करते हुए उनकी खूब प्रशंसा की है.
उन्होंने लिखा, “हर सुबह 6 बजे, चंडीगढ़ की शांत गलियों में यह 88 वर्षीय पूर्व पुलिस अधिकारी अपने सेवा के दिन की शुरुआत करता है. केवल एक साइकिल ठेला और कर्तव्य भावना के साथ, वह धीरे-धीरे चलते हुए सड़क के किनारे पड़ा कचरा उठाता है.”
महिंद्रा ने आगे जोड़ा, “उन्होंने चंडीगढ़ की ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ रैंकिंग पसंद नहीं की, लेकिन शिकायत करने की बजाय उन्होंने खुद काम शुरू कर दिया. उनका उठाया गया हर कचरे का टुकड़ा एक संदेश है- एक बेहतर दुनिया के प्रति विश्वास, उम्र की परवाह किए बिना सार्थक जीवन जीने की प्रेरणा. सेवा कभी सेवानिवृत्त नहीं होती. मकसद कभी बूढ़ा नहीं होता. इस शांत योद्धा को मेरा सलाम.”
‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ रैंकिंग से मिली प्रेरणा
इंदरजीत सिंह सिद्धू 1964 बैच के एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हैं. उनकी इस पहल के पीछे की वजह चंडीगढ़ की ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ रैंकिंग से जुड़ी है. जब उन्हें पता चला कि उनके शहर की स्वच्छता रैंकिंग उतनी अच्छी नहीं है जितनी होनी चाहिए, तो उन्होंने किसी सरकारी सहायता या फंड का इंतज़ार किए बिना खुद ही कमान संभालने का फैसला किया.
उन्होंने अकेले ही अपने मोहल्ले, सेक्टर-49 को साफ रखने का बीड़ा उठाया. यह दर्शाता है कि कैसे एक व्यक्ति, अगर ठान ले, तो बिना किसी बाहरी मदद के भी बड़ा बदलाव ला सकता है. उनकी यह पहल ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की मूल भावना को दर्शाती है.

जज्बे को सलाम और सम्मान की मांग
सोशल मीडिया पर सिद्धू के इस वीडियो को जबरदस्त सराहना मिल रही है. यूज़र्स उनके जज्बे और समर्पण को सलाम कर रहे हैं. एक यूज़र ने लिखा, “सच्चा बदलाव ताकत या पद से नहीं, बल्कि दिल और निरंतरता से आता है. उन्हें मेरा सलाम.
” एक अन्य यूज़र ने सुझाव दिया कि हर सुबह सेक्टर 49 के लोगों को उनसे जुड़ना चाहिए और फिर अपने-अपने इलाकों में इस मुहिम को आगे बढ़ाना चाहिए. कई यूज़र्स ने तो यहां तक कहा कि इंदरजीत सिंह सिद्धू ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का असली चेहरा बनने के लायक हैं.
यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि ऐसे प्रेरणादायी व्यक्तियों को सरकारी स्तर पर सम्मानित किया जाना चाहिए. कई लोगों का मानना है कि इंदरजीत सिंह सिद्धू जैसे लोगों की कहानियां स्कूली किताबों में शामिल की जानी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां सेवा, समर्पण और अपने समुदाय के प्रति ज़िम्मेदारी का सही अर्थ समझ सकें.
उनका कार्य हमें सिखाता है कि रिटायरमेंट का मतलब ज़िम्मेदारियों से मुक्ति नहीं, बल्कि जीवन के नए उद्देश्य खोजना हो सकता है.
इंदरजीत सिंह सिद्धू की कहानी यह साबित करती है कि उम्र केवल एक संख्या है जब बात दृढ़ संकल्प और देश सेवा की आती है. उनका यह निस्वार्थ कार्य न केवल चंडीगढ़ के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है कि हम सभी अपने आसपास को स्वच्छ रखने और अपने समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में योगदान दे सकते हैं.
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