लखनऊ पुलिस की जांच में प्रतीक Yadav यादव रंगदारी मामला: रियल एस्टेट कारोबारी पर गंभीर आरोप, 2027 चुनाव पर असर?
लखनऊ, उत्तर प्रदेश –
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश Yadav यादव के भाई तथा राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा Yadav यादव के पति प्रतीक यादव से रंगदारी मांगने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. पुलिस ने इस मामले में एक रियल एस्टेट कारोबारी, उसकी पत्नी और पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में ज़बरदस्त हलचल मच गई है.

₹4 करोड़ की रंगदारी और धोखाधड़ी का आरोप
प्रतीक Yadav यादव ने चिनहट के पूर्वांचल सिटी निवासी रियल एस्टेट कारोबारी कृष्णानंद पांडेय, उनकी पत्नी वंदना पांडेय और पिता अशोक पांडेय के खिलाफ गौतमपल्ली थाने में शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ रंगदारी मांगने, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है.
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने प्रतीक Yadav यादव से कारोबार में निवेश के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए. जब प्रतीक Yadav यादव ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने उन्हें पॉक्सो एक्ट में फंसाने और फेक ऑडियो वायरल करने की धमकी देना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं, आरोप है कि इन लोगों ने प्रतीक Yadav यादव से चार करोड़ रुपये की रंगदारी की भी मांग की.
यह मामला तब सामने आया है जब सपा प्रमुख अखिलेश Yadav यादव के भाई से सीधे तौर पर धोखाधड़ी और रंगदारी का आरोप लगा है, जिससे इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है.
कैसे हुई कृष्णानंद पांडेय से मुलाकात?
पुलिस को दी गई शिकायत में प्रतीक Yadav यादव ने बताया है कि उनकी मुलाकात कृष्णानंद पांडेय से वर्ष 2011-12 में हुई थी. कृष्णानंद पांडेय कई बार उनसे बिजनेस के नए-नए प्रस्ताव लेकर आए.
प्रतीक Yadav यादव ने आरोप लगाया कि करीब दो-तीन साल तक लगातार मेलजोल बढ़ाने और विश्वास जीतने के बाद, वह कृष्णानंद पांडेय की बातों में आ गए और उनके साथ निवेश किया. हालांकि, बाद में उन्हें धोखाधड़ी का एहसास हुआ जब उनके पैसे वापस नहीं किए गए और उन्हें धमकियाँ मिलने लगीं.

राजनीतिक गलियारों में मची हलचल और आगामी चुनावों पर असर
अखिलेश Yadav यादव के भाई प्रतीक Yadav यादव से रंगदारी जैसे मामले के सामने आते ही उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में ज़बरदस्त हलचल मच गई है. सत्तारूढ़ और विपक्षी पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.
विपक्ष की ओर से इस मामले पर तीखी प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि बयानबाजी का सिलसिला शुरू हो गया है. पार्टियाँ एक-दूसरे पर निशाना साध रही हैं और इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रही हैं.
जानकारों का मानना है कि इस प्रकरण का सीधा असर आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों पर भी देखने को मिल सकता है. यह मामला सपा और Yadav यादव परिवार के लिए एक नया सिरदर्द बन सकता है, जबकि विपक्षी दल इसे सरकार पर हमला बोलने और सपा की छवि खराब करने के अवसर के रूप में देख सकते हैं.
प्रतीक यादव का पारिवारिक और राजनीतिक जुड़ाव
सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे प्रतीक यादव मौजूदा समय में विक्रमादित्य मार्ग पर रहते हैं. उनकी पत्नी अपर्णा यादव उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं, जो भाजपा सरकार में एक महत्वपूर्ण पद पर हैं. इस पारिवारिक जुड़ाव के कारण भी यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है. प्रतीक यादव का यह मामला न केवल आपराधिक जांच का विषय है, बल्कि इसका राजनीतिक आयाम भी व्यापक है, क्योंकि यह सीधे तौर पर राज्य के एक प्रमुख राजनीतिक परिवार से जुड़ा हुआ है.
पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कृष्णानंद पांडेय और उनके परिवार द्वारा लगाए गए आरोप कितने सही हैं और इसमें और कौन-कौन शामिल हो सकता है. इस मामले में आगे क्या निकल कर आता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं. यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति और रियल एस्टेट सेक्टर में छिपे कुछ गहरे मुद्दों को भी उजागर कर सकती है.

