उत्तराखंड में Landslide भूस्खलन का कहर, चमोली में 300 मजदूर फंसे: रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

Landslide

 

उत्तराखंड में  Landslide भूस्खलन का कहर, चमोली में 300 मजदूर फंसे: रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

 

उत्तराखंड के चमोली जिले में भारी मानसूनी बारिश के बाद  Landslide भूस्खलन की एक बड़ी घटना सामने आई है। हेलंग के पास टीएचडीसी की विष्णुगढ़ जलविद्युत परियोजना स्थल पर हुए इस  Landslide भूस्खलन के कारण हड़कंप मच गया।

इस हादसे में लगभग 300 मजदूर मौके पर मौजूद थे, जिनमें से कई फंस गए और 12 मजदूर घायल हो गए हैं। सूचना मिलते ही राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं और तुरंत बचाव अभियान शुरू किया।

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Landslide भूस्खलन के बाद मची अफरा-तफरी

यह घटना तब हुई जब परियोजना स्थल पर काम चल रहा था। अचानक पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने लगा, जिससे वहां काम कर रहे मजदूरों में भगदड़ मच गई। जान बचाने के लिए भागे मजदूरों में से 12 को चोटें आईं।

जिला प्रशासन ने बताया कि घायलों में से आठ को मामूली चोटें आईं, जबकि चार मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सभी घायलों को तत्काल पीपलकोटी स्थित विवेकानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि Landslide  भूस्खलन के समय करीब 70 मजदूर घटनास्थल के बिल्कुल पास थे, जबकि कुल 300 मजदूर परियोजना स्थल पर मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि स्थिति को देखते हुए परियोजना स्थल पर काम फिलहाल रोक दिया गया है। जिलाधिकारी ने टीएचडीसी को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद ही काम फिर से शुरू किया जाए।

 

जारी है बचाव कार्य और हाई अलर्ट

इस घटना के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। भारी बारिश और  Landslide भूस्खलन के कारण कई रास्ते बंद हो गए हैं, जिससे आवागमन बाधित हो गया है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इस दौरान अनावश्यक रूप से यात्रा करने से बचें और अपने घरों में ही रहें। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार बचाव कार्य में जुटी हुई हैं और यह सुनिश्चित कर रही हैं कि सभी फंसे हुए मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

मौसम विभाग ने भी लोगों को चेतावनी जारी की है, जिसमें पहाड़ी इलाकों में यात्रा न करने की सलाह दी गई है। उत्तराखंड में मानसून की अधिकता के कारण इस तरह के  Landslide भूस्खलन की घटनाएं आम हो गई हैं, लेकिन इस बार की घटना काफी गंभीर है क्योंकि यह एक बड़े परियोजना स्थल पर हुई है।

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विष्णुगढ़ जलविद्युत परियोजना और  Landslide भूस्खलन

जिस परियोजना स्थल पर यह  Landslide भूस्खलन हुआ है, वह टीएचडीसी की विष्णुगढ़ जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है।

इस परियोजना के तहत जोशीमठ के पास हेलंग से अलकनंदा नदी के पानी को एक बैराज के माध्यम से रोका जा रहा है। इस पानी को फिर एक सुरंग के जरिए पीपलकोटी तक ले जाया जाएगा, जहां टर्बाइन के माध्यम से बिजली पैदा की जाएगी।

यह परियोजना पहले भी प्राकृतिक आपदा का शिकार हो चुकी है। साल 2021 में अलकनंदा नदी में आई बाढ़ के कारण बैराज का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। इस बार का Landslide  भूस्खलन एक बार फिर से इस क्षेत्र में निर्माण कार्य की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है।

प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।  Landslide भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्र को खाली कराया जा रहा है और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है।

इस घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं और पर्यावरण के बीच संतुलन की बहस छेड़ दी है, खासकर ऐसे संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में।

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