ऑपरेशन सिंदूर पर India भारत का रुख: जयशंकर ने संसद में दिया बड़ा बयान
नई दिल्ली:
राज्यसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चल रही चर्चा के दौरान, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा।
उन्होंने विशेष रूप से विपक्ष के उन दावों का खंडन किया, जिनमें India भारत द्वारा युद्धविराम की घोषणा में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका का जिक्र था। जयशंकर ने सिंधु जल संधि पर भी सरकार की सख्त नीति को दोहराया, वहीं दूसरी ओर, संसद के बाहर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा।

ट्रंप-मोदी फोन कॉल पर जयशंकर का स्पष्टीकरण
विपक्ष लगातार यह मुद्दा उठा रहा है कि India भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान युद्धविराम (सीजफायर) क्यों किया और इसमें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की क्या भूमिका थी। इस पर तीखा जवाब देते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सदन में कहा, “मैं उनको (विपक्ष) कहना चाहता हूँ, वो कान खोलकर सुन लें।
22 अप्रैल से 16 जून तक, एक भी फोन कॉल राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच में नहीं हुआ।” यह बयान विपक्ष के दावों को सीधे तौर पर खारिज करता है और यह स्पष्ट करता है कि India भारत ने अपने रणनीतिक फैसले किसी बाहरी दबाव में नहीं लिए थे।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति से चेतावनी और भारत की जवाबी कार्रवाई
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका के साथ संचार पर बोलते हुए, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने बताया, “9 मई को, अमेरिकी उपराष्ट्रपति वैंस ने प्रधानमंत्री को फोन करके चेतावनी दी कि अगले कुछ घंटों में पाकिस्तानी हमला होगा।
प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया था कि अगर कुछ भी हुआ, तो उसका उचित जवाब दिया जाएगा।” जयशंकर ने आगे कहा, “ऐसा हुआ, और हमारी प्रतिक्रिया ने पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणालियों को निष्क्रिय कर दिया और उनके हवाई अड्डों को निष्क्रिय कर दिया।
” यह खुलासा भारत की सैन्य तत्परता और पाकिस्तान के किसी भी दुस्साहस का प्रभावी ढंग से जवाब देने की उसकी क्षमता को दर्शाता है।
जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत से बात करने वाले किसी भी अंतर्राष्ट्रीय नेता या देश को यह बताया गया था कि पाकिस्तान को युद्ध रोकने के लिए अनुरोध करना होगा, और वह अनुरोध डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के माध्यम से ही आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, “दुनिया में कहीं भी ऐसा कोई नेता नहीं था जिसने India भारत से अपने अभियान रोकने के लिए कहा हो। व्यापार से कोई संबंध नहीं था। हमारे प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच कोई कॉल नहीं हुई थी।”
सिंधु जल संधि पर India भारत का कड़ा रुख
विदेश मंत्री ने सिंधु जल संधि पर India भारत के रुख को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “सिंधु जल संधि कई मायनों में एक अनूठा समझौता है। मैं दुनिया में ऐसे किसी भी समझौते के बारे में नहीं सोच सकता जहां किसी देश ने अपनी प्रमुख नदियों को उस नदी पर अधिकार के बिना दूसरे देश में बहने दिया हो। इसलिए यह एक असाधारण समझौता था।”
जयशंकर ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं कर देता। खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे।
” यह बयान पाकिस्तान पर आतंकवाद के मुद्दे पर दबाव बनाने और उसे अपनी नीति बदलने के लिए मजबूर करने की भारत की दृढ़ता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग इतिहास से असहज हैं और चाहते हैं कि ऐतिहासिक चीजों को भुला दिया जाए, लेकिन इतिहास को याद रखना महत्वपूर्ण है।

राहुल गांधी का पीएम मोदी पर निशाना
एक तरफ जहां विदेश मंत्री जयशंकर राज्यसभा में सरकार का पक्ष मजबूती से रख रहे थे, वहीं दूसरी ओर संसद के बाहर लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर फिर निशाना साधा।
राहुल गांधी ने कहा, “स्पष्ट है, प्रधानमंत्री ने यह नहीं कहा है कि ट्रंप झूठ बोल रहे हैं। सभी जानते हैं कि वह बोल नहीं पा रहे हैं। यही हकीकत है। अगर पीएम मोदी बोलेंगे, तो वे (डोनाल्ड ट्रंप) खुलकर बातें कहेंगे और पूरा सच सामने रखेंगे, इसीलिए वे (पीएम मोदी) बोल नहीं पा रहे हैं।
” राहुल गांधी का यह बयान प्रधानमंत्री की चुप्पी और ट्रंप के दावों को लेकर लगातार चल रही बहस को आगे बढ़ाता है, और इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा जारी है।
इस पूरे घटनाक्रम ने India भारत की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय संबंधों पर महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है।
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