India भारत का पराक्रम ‘ऑपरेशन सिंदूर: सुरक्षा के साथ जनहित का भी सम्मान
बीते मई के महीने में India भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात बन गए थे, जब सीमा पर तनाव चरम पर था। इस दौरान पाकिस्तान ने अपनी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए India भारत से सीजफायर के लिए गुहार लगाई, जिसे India भारत ने मानवीय दृष्टिकोण से स्वीकार कर लिया। हालांकि, इस सीजफायर समझौते के बाद भारतीय सेना के डिप्टी आर्मी चीफ राहुल आर सिंह ने एक बड़ा बयान दिया है।
उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर को एक सटीक और सुनियोजित सैन्य कार्रवाई बताया, जिसने India भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति का एक नया रूप दुनिया के सामने रखा है।

ऑपरेशन सिंदूर: विश्व के लिए एक बड़ी चुनौती
ऑपरेशन सिंदूर को केवल एक सैन्य कार्रवाई के रूप में देखना उचित नहीं होगा, बल्कि यह विश्व के सभी देशों के लिए एक स्पष्ट संदेश और चुनौती थी। इस ऑपरेशन के माध्यम से India भारत ने यह दृढ़ता से दर्शाया कि वह अपनी शक्ति और सुरक्षा के साथ कभी समझौता नहीं करेगा। यदि कोई India भारत को युद्ध के लिए उकसाएगा, तो उसे ‘ईंट का जवाब पत्थर से’ मिलेगा।
जिस तरह से ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादियों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया, उसने यह साबित कर दिया कि India भारत किसी भी सूरत में कमजोर नहीं है और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। यह कार्रवाई सिर्फ बदला नहीं थी, बल्कि यह आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण था।
कैंटोनमेंट के बंद मार्गों का खुलना: एक जनहितकारी पहल
ऑपरेशन सिंदूर के ठीक बाद, पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा पहलगाम में 29 भारतीय हिंदुओं की जघन्य हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस घटना के बाद भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक कर बदला लिया। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए, अयोध्या जिले के डोगरा रेजीमेंट एरिया की कई प्रमुख सड़कों, खासकर चारपहिया और दोपहिया वाहनों के लिए, पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया था।
कुछ सड़कें तो पहले से ही बंद थीं, जिससे गुप्तार घाट और मरी माता मंदिर जाने वाले भक्तों, आम नागरिकों, सेना के जवानों और उनके परिजनों को आवागमन में भारी असुविधा हो रही थी।
व्यापार और आवागमन पर पड़ा था गहरा असर
बंद किए गए इन मार्गों के कारण न केवल स्थानीय निवासियों को परेशानी हो रही थी, बल्कि व्यापार और व्यवसाय भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे थे, क्योंकि ये सड़कें आवागमन के प्रमुख मार्ग थे। इस गंभीर समस्या को लेकर पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की और उन्हें पत्र लिखकर कैंटोनमेंट की बंद सड़कों जैसे इमरान घाट रोड, आकाशवाणी के बगल से जाने वाली रोड, लाल कुर्ती रोड, और मरी माता मंदिर को जाने वाली रोड को आम नागरिकों के लिए फिर से खोलने की मांग की। उन्होंने सदर बाजार एरिया में सेना के परिजनों और सैनिकों को खरीदारी आदि के लिए जाने पर लगी रोक को भी हटाने का आग्रह किया।

श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मिलती थी असुविधा
मार्गों के बंद होने से केवल स्थानीय राहगीरों को ही नहीं, बल्कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था, खासकर गुप्तार घाट और मरी माता मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों पर जाने वालों को। उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे घंटों तक लंबा जाम भी लग जाता था। इस समस्या को देखते हुए, सरकार ने हाल ही में इन मार्गों को खोलने का ऐलान किया है।
सांसद के पत्र पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए रक्षा मंत्री ने कैंटोनमेंट की प्रमुख गुप्तार घाट को जाने वाली सड़कों, मीरन घाट, लाल कुर्ती, और मरी माता मंदिर को जाने वाली सभी सड़कों को आम जनता के लिए खोल दिया है।
यह कदम न केवल स्थानीय लोगों और सेना के परिजनों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी आवागमन को सुगम बनाएगा। यह दर्शाता है कि सरकार सुरक्षा के साथ-साथ जनसुविधाओं का भी पूरा ध्यान रख रही है।

