17 साल बाद India भारत को मिली बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेजबानी, 2026 में इतिहास रचने की बारी
नई दिल्ली:
17 साल का लंबा इंतजार खत्म हुआ! India भारत को एक बार फिर बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेजबानी का सुनहरा मौका मिला है. बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) ने 2026 में होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के लिए भारत को मेजबान चुना है.
यह दूसरी बार है जब भारत इस टूर्नामेंट की मेजबानी करेगा. इससे पहले 2009 में यह टूर्नामेंट हैदराबाद में आयोजित हुआ था. यह घोषणा फ्रांस की राजधानी पेरिस में 29वें संस्करण के समापन समारोह में की गई.
इस मौके पर बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन के अध्यक्ष खुनयिंग पटामा लीस्वदत्रकुल (Khunying Patama Leeswadtrakul) और बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) के महासचिव संजय मिश्रा मौजूद थे.
संजय मिश्रा ने वादा किया है कि India भारत पेरिस में आयोजित भव्य टूर्नामेंट के मानकों को बनाए रखेगा. यह घोषणा भारतीय बैडमिंटन के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और देश में इस खेल को और अधिक बढ़ावा देने में मदद करेगी.

भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि
बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेजबानी मिलना भारत के लिए एक सम्मान की बात है. यह न केवल खेल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अनुभव देने का भी एक शानदार अवसर होगा.
भारतीय बैडमिंटन एसोसिएशन के महासचिव संजय मिश्रा ने कहा, “हमारा लक्ष्य पेरिस द्वारा प्रदर्शित उत्कृष्टता और भव्यता के उन्हीं मानकों को बनाए रखना है. हम बैडमिंटन परिवार का दिल्ली में स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं.”
BAI के इस बयान से स्पष्ट है कि India भारत 2026 में एक विश्व स्तरीय टूर्नामेंट का आयोजन करने के लिए पूरी तरह से तैयार है. नई दिल्ली में आयोजित होने वाली यह चैंपियनशिप भारत को दुनिया के सामने अपनी खेल संस्कृति और आयोजन क्षमताओं को प्रदर्शित करने का मौका देगी.

पेरिस में भारत का प्रदर्शन और आगे की चुनौतियाँ
बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप 2025 का हाल ही में पेरिस में समापन हुआ, जहाँ भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा. इस टूर्नामेंट में India भारत ने सिर्फ एक कांस्य पदक जीता, जो पुरुष युगल में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने हासिल किया.
यह जोड़ी भारत की एकमात्र उम्मीद बनकर उभरी और उन्होंने देश को निराश नहीं किया.
सात्विक और चिराग ने अपने क्वार्टर फाइनल मैच में ओलंपिक पदक विजेता मलेशिया के आरोन चिया/सोह वूई यिक को 21-12, 21-19 से हराया, जो एक शानदार जीत थी. हालांकि, सेमीफाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा और उन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा.
यह पदक इस टूर्नामेंट में भारत का एकमात्र पदक था, जबकि चीन, जापान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और डेनमार्क जैसे देशों ने कई पदक जीते. चीन ने 2 स्वर्ण सहित कुल 6 पदक जीतकर शीर्ष स्थान हासिल किया.

2009 की मेजबानी और आज की उम्मीदें
India भारत ने आखिरी बार 2009 में इस टूर्नामेंट की मेजबानी की थी, जब यह हैदराबाद में आयोजित हुआ था. उस समय भी चीन ने 4 स्वर्ण सहित कुल 10 पदक जीतकर अपना दबदबा दिखाया था, जबकि भारत एक भी पदक नहीं जीत सका था.
2009 की तुलना में, भारतीय बैडमिंटन आज काफी बेहतर स्थिति में है. सात्विक-चिराग जैसी विश्व स्तरीय जोड़ी के अलावा, एच.एस. प्रणॉय और लक्ष्य सेन जैसे एकल खिलाड़ी भी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं.

2026 की चैंपियनशिप भारत के लिए इतिहास रचने का एक बड़ा मौका है. घरेलू मैदान पर खेलने का फायदा उठाते हुए, भारतीय खिलाड़ी न केवल अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकते हैं, बल्कि देश को एक से अधिक पदक भी दिला सकते हैं.
17 साल के इस लंबे इंतजार के बाद, भारतीय बैडमिंटन प्रेमी अपने खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं. 2026 में दिल्ली का यह आयोजन भारत को विश्व बैडमिंटन के केंद्र में ला सकता है और युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन सकता है.

