Katha भागवद कथा में हर्षोल्लास से हुई गोवर्धन पूजा
रबूपुरा। भगवान श्री कृष्ण के अवतरित होने से पूर्व गौलोक बसाया गया। जोकि ब्रज धाम नाम से भी जाना जाता है और वहां प्रभु श्री कृष्ण ने अनेकों लीलाएं कीं। इसी ब्रज क्षेत्र में विराजमान है गोवर्धन पर्वत। उक्त बातें कस्बा स्थित मीणा धर्मशाला में चल रही श्रीमदभागवद कथा Katha के पांचवे दिन कथावाचक उमानन्द शास्त्री ने कहीं। Katha

इसके साथ ही गोवर्धन पूजा का महत्व समझाते हुए उन्होंने कहा कि ब्रज में गोवर्धन पूजा का बहुत महत्व है। यह त्योहार भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों को इंद्रदेव के प्रकोप से बचाने की याद दिलाता है। गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है, दिवाली के बाद मनाई जाती है और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक तरीका है। Katha

गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के सम्मान में मनाई जाती है, जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों को विनाशकारी बारिश से बचाया था तथा यह त्योहार प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को दर्शाता है और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करता है। इस दौरान बीरपाल सिंह, रामगोपाल, नेत्रपाल सिंह, गोपाल, जीतन, भट्टू, संजू, चतर सिंह, मोहित, धर्मपाल, शारदा देवी, राखी देवी, गुड्डी देवी, बिमलेश, सरोज, सुनीता आदि मौजूद रहे। Katha
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