झारखंड के पूर्व राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन Vice President उपराष्ट्रपति पद की रेस में, पीएम ने दी हरी झंडी
Vice President उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार (20 अगस्त) को अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है.
इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और कई वरिष्ठ सांसद मौजूद रहे.
सबसे खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री मोदी खुद राधाकृष्णन के नामांकन के प्रस्तावक बने, जो यह दर्शाता है कि भाजपा और एनडीए उनके उम्मीदवारी को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं.
राधाकृष्णन का मुकाबला अब इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी से होगा. इस बार का Vice President उपराष्ट्रपति चुनाव इसलिए भी खास हो गया है क्योंकि दोनों ही प्रमुख उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं – राधाकृष्णन तमिलनाडु से और रेड्डी आंध्र प्रदेश/तेलंगाना से हैं.
यह मुकाबला दक्षिण बनाम दक्षिण की राजनीतिक जंग को दिखाता है, जहां दोनों गठबंधन दक्षिण भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं.

नामांकन से पहले प्रेरणा स्थल पर दी श्रद्धांजलि
नामांकन दाखिल करने से पहले सीपी राधाकृष्णन ने संसद परिसर में स्थित प्रेरणा स्थल जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की. यह स्थल देश की उन महान हस्तियों को समर्पित है जिनकी प्रतिमाएं यहां स्थापित हैं.
राधाकृष्णन ने सबसे पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने नमन किया और उसके बाद अन्य सभी महान हस्तियों को भी श्रद्धासुमन अर्पित किए. यह एक प्रतीकात्मक कार्य था जो उनके राजनीतिक और सामाजिक मूल्यों को दर्शाता है.
नामांकन की प्रक्रिया के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी का प्रस्तावक बनना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत है. यह दिखाता है कि पार्टी राधाकृष्णन के अनुभव और दक्षिण भारत में उनकी पकड़ का पूरा फायदा उठाना चाहती है. प्रधानमंत्री की मौजूदगी से यह संदेश भी गया कि एनडीए इस चुनाव को पूरी गंभीरता के साथ ले रहा है.

सीपी राधाकृष्णन: एक लंबा और समर्पित राजनीतिक सफर
सीपी राधाकृष्णन का राजनीतिक जीवन काफी लंबा और विविध रहा है. उनका जन्म तमिलनाडु के तिरुपुर में हुआ था. उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत 1974 में भारतीय जनसंघ के साथ की थी, जो भाजपा की पूर्ववर्ती पार्टी थी. वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से भी गहराई से जुड़े हुए हैं, जो उनकी विचारधारात्मक प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
राधाकृष्णन को उनके राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं. वह कोयंबटूर से दो बार लोकसभा सांसद चुने जा चुके हैं. संसद में उनका अनुभव और संसदीय प्रक्रियाओं की उनकी समझ उपराष्ट्रपति पद के लिए उन्हें एक मजबूत उम्मीदवार बनाती है.
इसके अलावा, वे तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने पार्टी को राज्य में मजबूत करने के लिए अथक प्रयास किए.
हाल के वर्षों में, राधाकृष्णन ने राज्यपाल के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं. वह झारखंड और तेलंगाना दोनों राज्यों के राज्यपाल रह चुके हैं. राज्यपाल के रूप में उनका अनुभव उन्हें संवैधानिक भूमिकाओं की बेहतर समझ देता है, जो उपराष्ट्रपति के रूप में राज्यसभा के सभापति के तौर पर उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा.

दक्षिण भारत में भाजपा का चेहरा
सीपी राधाकृष्णन को दक्षिण भारत में भाजपा के प्रमुख चेहरों में से एक माना जाता है. उन्होंने तमिलनाडु जैसे राज्य में, जहां भाजपा की पकड़ अपेक्षाकृत कमजोर रही है, पार्टी को मजबूत करने के लिए काफी काम किया है.
उनकी उम्मीदवारी को भाजपा की ‘दक्षिण भारत रणनीति’ के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में अपनी पैठ बढ़ाना है.
दूसरी ओर, इंडिया गठबंधन ने बी सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे भी दक्षिण भारत के महत्व को समझते हैं.
यह चुनाव दोनों गठबंधनों के लिए अपनी-अपनी रणनीतियों को प्रदर्शित करने का एक अवसर है.
इस चुनाव के नतीजे आने वाले दिनों में भारत की राजनीतिक दिशा पर भी प्रभाव डालेंगे. Vice President उपराष्ट्रपति चुनाव, जहां सांसद वोट करते हैं, अक्सर राजनीतिक गठबंधनों की ताकत का एक संकेतक भी होता है.
यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों उम्मीदवारों में से कौन इस पद पर जीत हासिल करता है, और यह जीत देश की राजनीति को किस तरह प्रभावित करती है.

