प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी का किया बचाव, Election Commission चुनाव आयोग से मांगा आरोपों पर जवाब
बिहार में राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत के साथ ही एक नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। राहुल गांधी ने Election Commission चुनाव आयोग और मतदाता सूची को लेकर गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें 7 दिन के भीतर अपने आरोपों का सबूत देने या देश से माफी मांगने की चुनौती दी।
इस पूरे मामले में अब रणनीतिकार और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने एंट्री ली है, और उन्होंने खुलकर राहुल गांधी का समर्थन करते हुए Election Commission चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है।
प्रशांत किशोर का यह बयान इस विवाद को एक नया मोड़ दे रहा है, क्योंकि वे सीधे तौर पर चुनाव आयोग के रवैये पर सवाल उठा रहे हैं।

प्रशांत किशोर का तीखा हमला: ‘माफी मांगने की बात क्यों?’
प्रशांत किशोर ने Election Commission चुनाव आयोग के ‘माफी मांगो’ वाले बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि, “मान लीजिए कि राहुल गांधी Election Commission चुनाव आयोग की बात नहीं मानते हैं, तो Election Commission चुनाव आयोग क्या कर लेगा?” उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले को राहुल गांधी बनाम Election Commission चुनाव आयोग बनाने का कोई मतलब नहीं है।
पीके ने कहा कि चुनाव आयोग को विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर बिंदुवार (point-by-point) जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा, “जवाब देने के बजाय आप कह रहे हैं कि माफी मांगो…।” उनका मानना है कि चुनाव आयोग को स्वेच्छा से यह कहना चाहिए था कि वे इन मामलों की जांच कर रहे हैं और जांच के बाद हर आरोप का उत्तर दिया जाएगा। यह एक स्वायत्त (autonomous) संस्था के रूप में Election Commission चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को और मजबूत करता।

डिजिटल डेटा क्यों नहीं अपलोड कर सकते? प्राइवेसी का बहाना
राहुल गांधी के आरोपों को “बेबुनियाद” बताने पर प्रशांत किशोर ने Election Commission चुनाव आयोग से पूछा कि, “आप बताइए तो कैसे…?” उन्होंने राहुल गांधी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए गए मुद्दों का हवाला दिया, जैसे कि कई मतदाताओं के पते के सामने ‘जीरो’ लिखा होना। पीके ने कहा कि अगर यह सब बेबुनियाद है तो Election Commission चुनाव आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसा क्यों है।
प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग के प्राइवेसी के तर्क को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “आप डिजिटल डेटा क्यों नहीं अपलोड कर सकते हैं?
प्राइवेसी का मामला बनाकर चुनाव आयोग लोगों को बेवकूफ बनाने का काम कर रहा है।” उन्होंने सवाल किया कि फॉर्म 20, फॉर्म 19, और फॉर्म 6 जैसे डेटा को सार्वजनिक करने से कौन सी प्राइवेसी का उल्लंघन होगा। जब मतदाता की जानकारी पहले से ही सार्वजनिक है, तो डेटा को डिजिटल रूप में जारी करने में क्या दिक्कत है?

‘राहुल गांधी ने वोटर को चोर नहीं कहा’
प्रशांत किशोर ने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी ने मतदाताओं पर नहीं, बल्कि चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता है कि राहुल गांधी ने वोटर को चोर कहा है। उन्होंने चुनाव आयोग पर यह आरोप लगाया है।
” इस बयान से उन्होंने साफ किया कि यह विवाद मतदाता बनाम नेता का नहीं, बल्कि विपक्ष बनाम चुनाव आयोग का है।
कुल मिलाकर, प्रशांत किशोर ने इस मामले में राहुल गांधी का खुलकर साथ दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।
उनका मानना है कि एक लोकतंत्र में सबसे महत्वपूर्ण संस्था होने के नाते, Election Commission चुनाव आयोग को विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों को गंभीरता से लेना चाहिए और उन्हें बेबुनियाद कहकर टालना नहीं चाहिए। यह घटना भविष्य में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर और भी सवाल खड़े कर सकती है।
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