Delhi की बिजली मांग
Delhi में गर्मियों के दौरान बिजली की मांग इस बार नया रिकॉर्डबना सकती है। अनुमान है कि Delhi की पीक पावर डिमांड 9000 मेगावाट से अधिक पहुंच सकतीहै। बढ़ती मांग के बीच राहत की बात ये है कि करीब 2670 मेगावाट ग्रीन पावर बिजली सप्लाई कोसंभालने में अहम भूमिका निभाएगी।
बिजली कंपनियों ने सरकार को जानकारी दी कि गर्मियों में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने केलिए उन्होंने अभी से तैयारी शुरू की है। अनुमान के मुताबिक इस साल राजधानी की पीक पावरडिमांड 9000 मेगावाट से अधिक पहुंच सकती है। पिछले 2025 की गर्मियों में ये मांग 8442मेगावाट तक दर्ज की गई थी।माना जा रहा कि मौजूदा रुझान जारी रहे तो आने वाले सालों में Delhi की बिजली मांग और बढ़ेगी
और 2028-29 तक ये 10,000 मेगावाट के पार भी पहुंच सकती है। लेकिन इस बढ़ती मांग के बीचबिजली आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में इस बार ग्रीन पावर की बड़ी भूमिका रहने वाली है।बीएसईएस क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान करीब 2670 मेगावाट हरित ऊर्जा उपलब्ध रहने की उम्मीद है,जो बिजली सप्लाई को संतुलित रखने में मदद करेगी।
ग्रीन पावर में सबसे बड़ा योगदान सौर ऊर्जा काअनुमान है कि करीब 840 मेगावाट बिजली सोलर स्रोतों से मिलेगी। इसके अलावा करीब 572
मेगावाट हाइड्रो पावर, 500 मेगावाट पवन ऊर्जा और 312 मेगावाट पंप्ड स्टोरेज प्लांट से उपलब्धहोगी। Delhi के विभिन्न इलाकों में लगे रूफटॉप सोलर सिस्टम भी बिजली आपूर्ति में योगदान देंगे।दक्षिण, पश्चिम, पूर्व और मध्य Delhi में रूफटॉप सोलर से करीब 250 मेगावाट बिजली मिलने काअनुमान है। इसके अलावा हाइब्रिड रिन्यूएबल स्रोतों से करीब 137 मेगावाट और वेस्ट टू एनर्जी प्लांटसे करीब 41 मेगावाट बिजली मिलेगी। किलोकरी में लगा 20 मेगावाट का बैटरी एनर्जी स्टोरेजसिस्टम (बीईएसएस) भी पीक समय में ग्रिड को संतुलित रखने में मदद करेगा।

2.25 करोड़ लोगों के लिए बिजली सप्लाई
बीएसईएस के मुताबिक कंपनी दक्षिण, पश्चिम, पूर्व और मध्य Delhi में करीब 53 लाखउपभोक्ताओं और करीब 2.25 करोड़ लोगों को बिजली सप्लाई करती है। दक्षिण और पश्चिम दिल्लीमें बिजली सप्लाई करने वाली बीआरपीएल के क्षेत्र में इस साल पीक डिमांड करीब 3997 मेगावाटतक पहुंच सकती है, जबकि 2025 में ये 3798 मेगावाट थी। वहीं पूर्व और मध्य Delhi में बिजलीदेने वाली बीवाईपीएल के क्षेत्र में ये मांग 1824 मेगावाट से बढ़कर करीब 1991 मेगावाट तक पहुंचनेका अनुमान है।
एआई लर्निंग से स्मार्ट होगा विजली वितरण
बिजली कंपनियों ने अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए थर्मो-स्कैनिंग के जरिए संभावितहॉटस्पॉट की पहचान कर रहे हैं, ताकि किसी भी तकनीकी समस्या को पहले ही दूर किया जा सके।बिजली की मांग का सही अनुमान लगाने के लिए बीएसईएस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीनलर्निंग आधारित मॉडल का इस्तेमाल कर रहा है। मौसम से जुड़े आंकड़ों और तकनीकी विश्लेषण कीमदद से बिजली की मांग का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा रहा है।मौसम संबंधी विशेषज्ञता भी ली जा रही है, जिससे उस दिन की मांग का आकलन बेहतर तरीके से
किया जा सके। कंपनी जरूरत पड़ने पर पावर एक्सचेंज के रियल टाइम मार्केट का भी उपयोग करेगी,जिससे नवीकरणीय ऊर्जा की सप्लाई को संतुलित रखते हुए ग्रिड की स्थिरता बनाए रखी जा सके।चरणबद्ध बिजली खरीद रणनीति अपनाई गई है, ताकि लागत नियंत्रित रहे और जरूरत के समयपर्याप्त बिजली उपलब्ध हो सके।
इसके लिए बीएसईएस ने केरल, छत्तीसगढ़, मणिपुर और मुंबई कीडिस्कॉम कंपनियों के साथ बिजली बैंकिंग की व्यवस्था भी की है। जरूरत पड़ने पर इससे करीब 470मेगावाट तक अतिरिक्त बिजली मिल सकती है।
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