पहाड़ों पर आफत की बारिश: किश्तवाड़ में Cloud बादल फटा, मचा हाहाकार

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 पहाड़ों पर आफत की बारिश: किश्तवाड़ में  Cloudबादल फटा, मचा हाहाकार

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में 14 अगस्त को  Cloud बादल फटने की घटना ने पूरे इलाके में तबाही मचा दी है. मचैल माता मंदिर के रास्ते में पड़ने वाले सुदूर गांव चिसोटी में अचानक आई बाढ़ ने जीवन और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया है.

इस प्राकृतिक आपदा के बाद, पूरा माहौल शोक और पीड़ा से भर गया है, जबकि लापता हुए लोगों के परिजन बेसब्री से अपने प्रियजनों के सुरक्षित लौटने का इंतजार कर रहे हैं.

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त्रासदी का भयावह मंजर

गुरुवार, 14 अगस्त की दोपहर, जब यह विनाशकारी  Cloud बादल फटा, तब मचैल माता मंदिर यात्रा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां इकट्ठा थे.

यह यात्रा 25 जुलाई को शुरू हुई थी और 5 सितंबर को समाप्त होनी थी. अचानक आई बाढ़ ने लोगों को संभलने का मौका ही नहीं दिया. पानी और मलबा इतनी तेजी से आया कि कोई कुछ समझ ही नहीं पाया.

इस त्रासदी में अब तक 61 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से अधिकतर श्रद्धालु थे. 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं और करीब 50 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत और बचाव अभियान जारी है. लापता लोगों के परिजन इस आस में दिन-रात बिता रहे हैं कि शायद कोई चमत्कार हो जाए और उनके अपने वापस आ जाएं.

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अस्पताल में मरीजों की स्थिति

घायलों को तत्काल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) अस्पताल में भर्ती कराया गया. कुल 75 मरीजों को इलाज के लिए यहां लाया गया था. दुर्भाग्यवश, इनमें से एक मरीज, सांबा जिले के विजयपुर के 35 वर्षीय अशोक कुमार, ने 16 अगस्त को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

अस्पताल द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, चार अन्य मरीजों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है. अस्पताल ने 75 में से 24 मरीजों का सफल ऑपरेशन किया है.

वहीं, 20 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि 3 मरीज बिना बताए चले गए और 4 अन्य चिकित्सकीय सलाह के खिलाफ अस्पताल छोड़ गए.

इसके अलावा,  Cloud बादल फटने से प्रभावित चिसोटी गांव से 11 शव और शरीर का एक अंग भी अस्पताल के मुर्दाघर में लाया गया था. चिकित्सा संबंधी औपचारिकताओं के बाद, इन शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है.

संपत्ति का भारी नुकसान

इस प्राकृतिक आपदा ने सिर्फ जान-माल का ही नुकसान नहीं किया, बल्कि गांव की बुनियादी संरचना को भी तहस-नहस कर दिया है.

अचानक आई बाढ़ में 10 से अधिक आवासीय मकान, छह सरकारी भवन, दो अन्य मंदिर, चार पवन चक्की और एक पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए.

इसके अलावा, एक दर्जन से अधिक वाहन भी इस बाढ़ की चपेट में आकर मलबे में दब गए. गांव का पूरा परिदृश्य ही  Cloud बदल गया है और हर तरफ सिर्फ विनाश के निशान नजर आ रहे हैं.

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लापता लोगों की तलाश जारी

लापता लोगों को खोजने के लिए सेना, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें लगातार अभियान चला रही हैं.

खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी इलाका होने के कारण बचाव कार्य में काफी चुनौतियां आ रही हैं.

टीमें मलबे और कीचड़ के नीचे दबे लोगों को खोजने की हर संभव कोशिश कर रही हैं. वहीं, प्रशासन ने पीड़ितों के लिए राहत शिविर स्थापित किए हैं और उन्हें हर संभव मदद मुहैया कराने का प्रयास किया जा रहा है.

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इस दुखद घटना ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को गहरा सदमा पहुंचाया है. प्राकृतिक आपदाएं मानव जीवन पर कितना बड़ा कहर ढा सकती हैं, यह घटना उसका एक और भयावह उदाहरण है.

इस मुश्किल घड़ी में, सभी की निगाहें बचाव दल पर टिकी हैं, इस उम्मीद में कि वे लापता लोगों को जल्द से जल्द ढूंढ निकालेंगे और इस त्रासदी से प्रभावित परिवारों को कुछ राहत मिलेगी.

इस आपदा से उबरने में लंबा समय लगेगा. गांव को फिर से बसाना और लोगों के जीवन को पटरी पर लाना एक बड़ी चुनौती होगी. इस समय सबसे जरूरी है कि हम सभी प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना और सहयोग दिखाएं.

 

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