चैतन्य Baghel बघेल को सुप्रीम कोर्ट से फिर लगा एक बार झटका

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चैतन्य  Baghel बघेल को सुप्रीम कोर्ट से फिर लगा एक बार झटका

 

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश Baghel बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर बड़ा झटका लगा है।

शराब घोटाले के मामले में गिरफ्तार बेटे चैतन्य बघेल के बचाव के लिए भूपेश Baghel बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने इस पर सुनवाई से इनकार कर दिया और उन्हें छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट जाने की सलाह दी। यह फैसला Baghel  बघेल परिवार के लिए एक और निराशाजनक कदम है, जो इस मामले में लगातार कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहा है।

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चैतन्य  बघेल को सुप्रीम कोर्ट से फिर लगा एक बार झटका

2100 करोड़ के शराब घोटाले का आरोप

 

यह मामला छत्तीसगढ़ में 2019 से 2022 के बीच हुए कथित 2100 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। ED के मुताबिक, चैतन्य  Baghel बघेल ने इस अवैध कमाई से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रबंधन किया और अपनी रियल एस्टेट परियोजनाओं में 16.7 करोड़ रुपये का निवेश किया।

ED ने 18 जुलाई को चैतन्य  Baghel बघेल को दुर्ग जिले के भिलाई स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इस मामले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा, अनवर ढेबर और पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा सहित कई अन्य लोगों को भी पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

 

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी और याचिका खारिज

 

भूपेश  Baghel बघेल ने अपने बेटे चैतन्य बघेल को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी थी।

इस पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने इस दौरान एक तल्ख टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया, “पीएमएलए (PMLA) कानून पर सवाल तभी क्यों उठते हैं, जब कोई रसूखदार व्यक्ति आरोपी बनता है?” यह टिप्पणी सीधे तौर पर भूपेश बघेल के राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव पर एक सवाल खड़ा करती है।

इससे पहले भी, चैतन्य  Baghel बघेल की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया था और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

अब सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से इस मामले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है, जिससे बघेल परिवार की कानूनी लड़ाई और भी जटिल हो गई है।

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भूपेश बघेल

भूपेश  Baghel बघेल का षड्यंत्र का आरोप

 

सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद भूपेश बघेल ने एक बार फिर जांच की निष्पक्षता की मांग की है। उनका कहना है कि यह एक राजनीतिक षड्यंत्र है, जिसमें उन्हें और उनके बेटे को फंसाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए ताकि सही चेहरे और सही तथ्य सामने आ सकें। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और लगातार याचिकाओं को खारिज करने से उनके इन आरोपों को फिलहाल कोई कानूनी समर्थन नहीं मिल पा रहा है।

इस मामले में चैतन्य बघेल की अगली कोर्ट पेशी 18 अगस्त को होगी, जहां उनके भविष्य को लेकर कोई नया मोड़ आ सकता है। फिलहाल, भूपेश बघेल और उनके बेटे को कानूनी राहत के लिए अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अपनी लड़ाई जारी रखनी होगी।

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