जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने चार (E-libraries) ई-पुस्तकालयों का किया शिलान्यास

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जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने चार (E-libraries) ई-पुस्तकालयों का किया शिलान्यास

जर्जर पंचायत घरों का कायाकल्प, 1.12 करोड़ से नए भवन; कंप्यूटर-इंटरनेट सहित आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी छात्रों को।

ग्रेटर नोएडा E-libraries। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने महत्वपूर्ण पहल की है। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने रविवार को नवादा, बरसात, घंघौला और हतेवा गांवों में जर्जर पंचायत घरों की जगह नए ई-पुस्तकालय (E-libraries) भवनों का शिलान्यास किया। इस परियोजना से गांव के युवाओं को आधुनिक डिजिटल संसाधन उपलब्ध होंगे, जिससे वे प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी गांव में रहकर ही कर सकेंगे।

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प्राधिकरण के वर्क सर्किल 8 के तहत कुल 13 ई-पुस्तकालय E-libraries बनाने की योजना है। पहले चरण में इन चार गांवों में पुराने पंचायत घरों को ध्वस्त कर नए भवन बनाए जाएंगे, जिनकी अनुमानित लागत 1.12 करोड़ रुपये है। शेष नौ गांवों में पंचायत घरों की स्थिति बेहतर होने से उनका नवीनीकरण किया जाएगा, जिसके लिए 95.47 लाख रुपये आवंटित हैं। निर्माण एजेंसी को कार्यादेश जारी हो चुका है और छह महीने में सभी भवन तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

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प्रत्येक ई-पुस्तकालय (E-libraries) में बड़ा कमरा, बरामदा और अलग-अलग शौचालय होंगे। प्राधिकरण फर्नीचर, कंप्यूटर, इंटरनेट और अन्य डिजिटल उपकरण भी उपलब्ध कराएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ेगी और शिक्षा के प्रति जागरूकता आएगी।

 

पंचायत चुनाव समाप्त होने के बाद प्राधिकरण के पास विकास कार्यों की जिम्मेदारी है। रखरखाव के अभाव में कई पंचायत घर खंडहर बन रहे थे। ग्रामीणों की मांग पर इन्हें ज्ञान केंद्र बनाने का निर्णय लिया गया। वरिष्ठ प्रबंधक नागेंद्र सिंह ने बताया कि टेंडर पूरा हो चुका है और निर्माण युद्धस्तर पर शुरू हो गया है। अच्छी स्थिति वाले भवनों का सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा।

शिलान्यास कार्यक्रम में विधायक धीरेंद्र सिंह ने कहा कि पुस्तकालय E-libraries समाज की उन्नति का आधार हैं। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के मेधावी छात्रों को सबसे अधिक लाभ होगा, जो शहर जाकर कोचिंग नहीं ले सकते। इस योजना से क्षेत्र में शैक्षणिक माहौल बदलेगा और भविष्य में अन्य सर्किलों में भी विस्तार होगा।

 

ग्रामीणों ने पहल का स्वागत किया, खासकर वे जो पहले आपसी सहयोग से छोटे पुस्तकालय चला रहे थे। अब उन्हें सरकारी सहयोग और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

 

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