15th-edition-of-india-cp-radhakrishnan जानें कैसे एक साधारण स्वयंसेवक से लेकर वे देश के दूसरे सर्वोच्च पद तक पहुंचे। उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 के नतीजे, उनके राजनीतिक सफर और बीजेपी की रणनीति का पूरा विश्लेषण।
15th-edition-of-india-cp-radhakrishnan : एक ऐतिहासिक जीत
9 सितंबर 2025 को हुए Vice President उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने एक बड़ी जीत दर्ज कर भारत के 15वें Vice President उपराष्ट्रपति का पद संभाला। उन्होंने ‘इंडिया’ ब्लॉक के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों के अंतर से हराया।
यह जीत सिर्फ एक चुनावी सफलता नहीं है, बल्कि भाजपा की बढ़ती राजनीतिक पकड़ और दक्षिण भारत में अपनी स्थिति को मजबूत करने की रणनीति का भी संकेत है।
एक सामान्य स्वयंसेवक से लेकर देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद तक का उनका सफर कड़ी मेहनत और समर्पण का एक बेहतरीन उदाहरण है।

Vice President उपराष्ट्रपति चुनाव के मुख्य परिणाम
यह चुनाव एनडीए और ‘इंडिया’ ब्लॉक के बीच एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई थी। चुनाव में कुल 781 सांसदों में से 767 ने वोट डाला।
सीपी राधाकृष्णन को 452 वोट मिले।
बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोटों से संतोष करना पड़ा।
15 वोट अमान्य घोषित किए गए और 14 सांसद अनुपस्थित रहे।
यह परिणाम दर्शाता है कि संसद के दोनों सदनों में एनडीए के पास एक मजबूत और एकजुट बहुमत है।

कौन हैं सीपी राधाकृष्णन? एक परिचय
चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन का जन्म 4 मई 1957 को तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुआ था।
उनका राजनीतिक करियर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक स्वयंसेवक के रूप में शुरू हुआ।
1974 में उन्होंने भारतीय जनसंघ से राजनीति में कदम रखा।
1996 में वह तमिलनाडु भाजपा के सचिव बने और पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
1998 और 1999 में उन्हें कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुना गया।
इन कार्यकाल में उन्होंने कपड़ा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया।

राजभवन से संसद तक: राज्यपाल के रूप में अनुभव
Vice President उपराष्ट्रपति बनने से पहले, सीपी राधाकृष्णन ने विभिन्न राज्यों के राज्यपाल के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
2023 से 2024 तक उन्होंने झारखंड के राज्यपाल के रूप में काम किया।
इस दौरान, उन्हें तेलंगाना और पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी मिला।
2024 में उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
राज्यपाल के रूप में उनके अनुभव ने उन्हें संसदीय और संवैधानिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ दी है, जो राज्यसभा के सभापति के रूप में उनके लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।

आगे की राह और राजनीतिक संदेश
सीपी राधाकृष्णन की जीत से दक्षिण भारत में भाजपा की पैठ बढ़ने की उम्मीद है। उन्हें Vice President उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने यह संदेश दिया है कि वह क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को महत्व देती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे उपराष्ट्रपति के रूप में राज्यसभा को कैसे संचालित करते हैं।
दूसरी ओर, इस हार ने ‘इंडिया’ ब्लॉक के लिए कई सवाल खड़े किए हैं। उन्हें भविष्य के चुनावों के लिए अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा ताकि वे एनडीए की संगठनात्मक ताकत का मुकाबला कर सकें।
राधाकृष्णन की यह जीत बताती है कि निष्ठा, मेहनत और समर्पण से कोई भी व्यक्ति सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। यह उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ भाजपा की राजनीतिक पकड़ का भी प्रमाण है।
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