ग्रेटर नोएडा डिजिटल रेप केस: कोर्ट ने दोषी को दी आजीवन कारावास की सजा, School स्कूल पर 10 लाख का जुर्माना
सुरजपुर जिला न्यायालय ने एक बेहद संवेदनशील मामले में न्याय का फैसला सुनाया है। ग्रेटर नोएडा के डीपीएस स्कूल school में 2018 में साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ हुए डिजिटल रेप के मामले में अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
इस घटना में सिर्फ आरोपी ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन भी लापरवाही का दोषी पाया गया है, जिस पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

जघन्य अपराध और आरोपी को सजा
यह घटना 12 जुलाई 2018 को हुई थी, जिसने पूरे देश को हिला दिया था। जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता चवनपाल सिंह के अनुसार, डीपीएस स्कूल में स्वीमिंग पूल के पास खेलते समय साढ़े तीन साल की बच्ची को स्वीमिंग पूल का लाइफ गार्ड चंडीदास बहला-फुसलाकर एक दीवार के पास ले गया और उसके साथ यह घिनौना काम किया।
इस मामले में पोक्सो कोर्ट के न्यायाधीश मनोज कुमार हिमांशु ने आरोपी चंडीदास को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, उस पर 24,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
अगर वह जुर्माना जमा नहीं करता है, तो उसे छह महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह फैसला समाज में ऐसे जघन्य अपराधों के प्रति सख्त संदेश देता है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
School स्कूल प्रबंधन की लापरवाही और जुर्माना
इस मामले में अदालत ने सिर्फ आरोपी को ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही को भी गंभीरता से लिया है। अदालत ने डीपीएस School स्कूल को इस घटना के लिए उत्तरदायी माना है और उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना उन्हें आदेश की तारीख से एक महीने के भीतर जमा कराना होगा।
घटना के बाद school स्कूल प्रबंधन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने इस मामले को दबाने की कोशिश की थी। आरोप यह भी था कि घटना की जानकारी होने के बाद भी उन्होंने तुरंत कार्रवाई करने के बजाय दो दिन तक इसे छिपाए रखा। इसके अलावा, बच्ची के माता-पिता पर भी इस मामले को रफा-दफा करने का दबाव बनाया गया था।
अदालत का यह फैसला स्कूल school प्रबंधन के लिए एक कड़ा संदेश है कि बच्चों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जब भी ऐसी कोई घटना होती है, तो तुरंत कानूनी कार्रवाई करना उनकी जिम्मेदारी है, न कि उसे दबाने की कोशिश करना।
कानूनी प्रक्रिया और न्याय की जीत
इस मामले में चवनपाल भाटी, शासकीय अधिवक्ता, ने बताया कि यह फैसला न्याय की जीत है। यह दिखाता है कि हमारी न्यायिक प्रणाली बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति कितनी संवेदनशील है।
यह फैसला उन सभी माता-पिता के लिए भी एक उम्मीद की किरण है, जो अपने बच्चों को स्कूल जैसी सुरक्षित जगहों पर भेजते हैं।
यह घटना एक बड़ा सबक है कि हमें अपने बच्चों को बाहरी दुनिया से सुरक्षित रखने के लिए हमेशा सतर्क रहना चाहिए।
अदालत का यह फैसला न केवल अपराधी को सजा देता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि स्कूल और संस्थानों जैसे जिम्मेदार पक्ष भी अपनी ड्यूटी निभाएँ।
स्कूल प्रबंधन की लापरवाही पर जुर्माना लगाकर, अदालत ने एक मजबूत मिसाल पेश की है कि अगर बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जाता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
यह फैसला भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में मदद करेगा और बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

